Jaishankar statement: डायलॉग में जयशंकर का बड़ा बयान, ‘भारत का उदय अपनी ताकत से होगा’

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Jaishankar statement:

नई दिल्ली, एजेंसियां। नई दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित वैश्विक मंच रायसीना डायलॉग में भारत के विदेश मंत्री S. जयशंकर ने देश की बढ़ती रणनीतिक ताकत और विदेश नीति पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत का उदय किसी अन्य देश की गलतियों से नहीं बल्कि अपनी क्षमताओं और मजबूत नीतियों के आधार पर तय होगा।जयशंकर ने कहा कि भारत आज वैश्विक स्तर पर अपनी स्वतंत्र पहचान बना रहा है और हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत का विकास उसकी घरेलू ताकत, आर्थिक क्षमता और रणनीतिक सोच पर आधारित है।

अमेरिका को दिया परोक्ष संदेश

विदेश मंत्री का यह बयान अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी के हालिया बयान के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका भारत के साथ व्यापार में वही गलती नहीं दोहराएगा जो उसने चीन के साथ दो दशक पहले की थी।इस संदर्भ में जयशंकर ने दो टूक कहा कि भारत का भविष्य भारत ही तय करेगा। उन्होंने कहा कि भारत किसी दूसरे देश की कमजोरियों या गलतियों पर निर्भर नहीं है, बल्कि अपनी क्षमताओं के दम पर आगे बढ़ रहा है।

हिंद महासागर क्षेत्र को बताया अहम पारिस्थितिकी तंत्र

जयशंकर ने हिंद महासागर क्षेत्र को वैश्विक भू-राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए कहा कि यह एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र है जो लगातार बदल रहा है और नए स्वरूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने इस क्षेत्र में कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर काफी निवेश किया है।विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि अगर भारत मजबूत होगा तो इसका फायदा हिंद महासागर के अन्य देशों को भी मिलेगा। उन्होंने इस क्षेत्र में संसाधनों, परियोजनाओं और ठोस प्रतिबद्धताओं के महत्व पर भी जोर दिया।

ईरानी जहाजों के मुद्दे पर भारत का मानवीय रुख

जयशंकर ने हाल ही में ईरानी नौसेना से जुड़े घटनाक्रमों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ईरान का युद्धपोत IRIS Dena एक अभ्यास के बाद लौटते समय श्रीलंका के समुद्री क्षेत्र में डूब गया था। इस घटना को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताया।वहीं तकनीकी समस्या से जूझ रहे दूसरे ईरानी जहाज IRIS Lavan को भारत ने मानवीय आधार पर Kochi Naval Base में डॉक करने की अनुमति दी। इस जहाज में 183 चालक दल के सदस्य सवार थे। भारत ने मानवीय सिद्धांतों के तहत इस अनुरोध को स्वीकार किया।

भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर भी जताई चिंता

विदेश मंत्री ने वैश्विक समुद्री व्यापार में काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा को भी अहम मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि व्यापारिक जहाजों पर होने वाले हमलों में अक्सर भारतीय नाविक भी प्रभावित होते हैं।उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले करोड़ों भारतीयों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार की रक्षा भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है। जयशंकर ने यह भी कहा कि समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और ज्यादा गंभीरता से लेने की जरूरत है।

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