पोर्ट मोरेस्बी : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक पुरानी कहावत का जिक्र करते हुए 14 प्रशांत द्वीपीय देशों के नेताओं से कहा कि सच्चा मित्र वही होता है, जो कठिन घड़ी में काम आए और जिन्हें विश्वासपात्र समझा जाता था वे ‘‘जरूरत के समय हमारे साथ खड़े नहीं रहे।’’ऐसा माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने चीन का परोक्ष जिक्र करते हुए यह बात कही।
मोदी ने हिंद-प्रशांत द्वीपीय सहयोग मंच (एफआईपीआईसी) को संबोधित करते हुए प्रशांत द्वीपीय देशों को भरोसा दिलाया कि भारत ‘‘बिना किसी हिचकिचाहट’’ के उनके साथ अपने अनुभव और क्षमताएं साझा करने के लिए तैयार है और ‘‘हम हर तरीके से आपके साथ हैं।’’ पापुआ न्यू गिनी की राजधानी में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने ऐसे समय में ये टिप्पणियां की हैं, जब चीन क्षेत्र में आक्रामक रवैया अपना रहा है और प्रशांत द्वीपीय देशों पर अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिशें कर रहा है। मोदी पापुआ न्यू गिनी की यात्रा करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं।
मोदी ने कोविड-19 वैश्विक महामारी के प्रतिकूल प्रभाव और अन्य वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘जिन्हें हम अपना विश्वासपात्र समझते थे, ऐसा पाया गया कि वे जरूरत के समय हमारे साथ खड़े नहीं रहे। इस मुश्किल दौर में पुरानी कहावत सही साबित हुई: सच्चा दोस्त वही है, जो कठिन घड़ी में काम आए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि भारत इस मुश्किल समय में भी अपने प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहा। भले ही भारत में निर्मित टीकों या आवश्यक दवाइयों की बात हो या गेहूं या चीनी की बात हो, भारत ने अपनी क्षमताओं के अनुसार अपने साथी देशों की मदद करना जारी रखा।’’







