चुनाव में लगातार हार के बावजूद निर्दलीय उम्मीदवार नहीं हारते हिम्मत

2 Min Read

नयी दिल्ली, एजेंसियां : चुनावी मौसम में जहां उम्मीदवार जीत के लिए जी-तोड़ मेहनत करते हैं, वहीं कुछ उम्मीदवार ऐसे भी हैं जो अपनी हार को ही सम्मान का तमगा मान लेते हैं।

दृढ़ संकल्प वाले कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों के एक समूह ने चुनाव हारने का जोखिम उठाया है और यह सुनिश्चित करने के लिए वे सब कुछ कर रहे हैं- लोगों से उन्हें वोट न देने की अपील करने से लेकर असफलता पर इतराने तक।

ऐसे ही एक निर्दलीय उम्मीदवार हैं तमिलनाडु के के. पद्मराजन, जो गर्व से खुद को ‘चुनावी राजा’ कहते हैं और चुनाव मैदान में शायद वह एकमात्र ऐसे उम्मीदवार हैं, जो लोगों से उन्हें वोट न देने का आग्रह करते हैं, ताकि वह ‘सबसे असफल उम्मीदवार’ होने का अपना तमगा बरकरार रख सकें। उनकी यह उपलब्धि लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है।

टायर मरम्मत की दुकान के मालिक के. पद्मराजन (65) को सबसे अधिक चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार के रूप में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराने की उपलब्धि पर भी गर्व है।

उनका दावा है कि धूमधाम के साथ नामांकन पत्र दाखिल करने के खर्च के अलावा चुनावों में जब्त हुई जमानत राशि में अब तक वह 80 लाख रुपये का नुकसान झेल चुके हैं।

चुनाव लड़ने के अपने 239वें प्रयास के लिए तैयारी करते हुए पद्मराजन ने 18वें लोकसभा चुनाव के लिए केरल के त्रिशूर और तमिलनाडु के धर्मपुरी से अपना नामांकन दाखिल किया है।

पद्मराजन ने कहा, ‘‘मैंने 1988 में तमिलनाडु स्थित अपने गृह नगर मेट्टूर से चुनाव लड़ना शुरू किया था।

मैंने अब तक 238 चुनाव लड़े हैं, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्रियों- अटल बिहारी वाजपेयी, पी वी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह के खिलाफ उम्मीदवारी भी शामिल है।

यह मेरा 239वां प्रयास होगा। मैं हर बार एक अनोखी लड़ाई चुनता हूं।’’

इसे भी पढ़ें

सामान्य व्यक्ति के तौर पर केजरीवाल से मिल सकते हैं मान : तिहाड़ जेल अधिकारी

Share This Article
कोई टिप्पणी नहीं