आंदोलनरत शिक्षक पड़ गये फेर में
पटना। बिहार में नियोजित शिक्षक अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। वे बिहार के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मांग कर रहे हैं कि वह अपना वादा पूरा करें।
दरअसल, शिक्षकों का आदोलन शुरू होने के समय से ही सम्राट चौधरी उन्हें समर्थन दे रहे थे। कई बार सड़क पर उतर कर शिक्षकों के समर्थन में उन्होंने आवाज उठाई।
उन्होंने शिक्षकों की इस मांग का खुलकर समर्थन किया कि नियोजित शिक्षकों को सीधे राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाये। ये भी समर्थन दिया था कि राज्यकर्मी के दर्जे के लिए परीक्षा लेना ही है, तो ऑफलाइन ली जाये।
इस बीच नीतीश कुमार ने पाला बदल लिया और राज्य में एनडीए की सरकार बन गई। सम्राट चौधरी सरकार में उप मुख्यमंत्री बन गये।
अब नियोजित शिक्षकों की उम्मीद जगी है कि सम्राट चौधरी उनकी मांगें सुन लेंगे। परंतु अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे नियोजित टीचरों को सरकार की ओर से किए गए वादों से मोह भंग होने लगा है।
शिक्षक संघ को ऐसा लगने लगा है कि सरकार में शामिल दलों के ही मत अलग-अलग हैं। ऐसे में सरकार आंदोलन की राह को भटकाने की कोशिश कर रही है।
इसी कोशिश के तहत नियोजित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। बता दें नियोजित शिक्षक बिना शर्त राज्यकर्मी का दर्जा चाहते हैं, जबकि माध्यमिक शिक्षक परीक्षा तो देना चाहते हैं पर ऑफ लाइन।
बीजेपी जब सरकार में नहीं थी तब नियोजित शिक्षकों के समर्थन में सड़कों पर उतरी थी। तब बीजेपी भी बिना शर्त राज्यकर्मी का दर्जा देने की पक्षधर थी।
यह आंदोलन भी प्रदेश अध्यक्ष के रूप में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में ही चल रहा था। पर इस बार शिक्षक संघों के प्रतिनिधि से सम्राट चौधरी की बातचीत पर संशय उठने लगे हैं।
माध्यमिक शिक्षक संघ मानता है कि बीजेपी का प्रदेश कार्यालय में शिक्षक प्रतिनिधियों से हुई वार्ता का कोई मतलब नहीं है। वार्ता केवल आंदोलन को टालने के लिए हो रही है।
एक तरफ सम्राट चौधरी नियोजित शिक्षकों से उनकी मांग पूरा करने का वादा कर रहे हैं और दूसरी तरफ शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने घोषणा की है कि सक्षमता परीक्षा पांच बार ली जायेगी। दो बार ऑफलाइन और तीन बार ऑनलाइन।
शिक्षकों का कहना है कि सरकार शामिल दलों के नेताओं में ही मतभेद है।
इसे भी पढ़ें
बिहार में भगोड़े शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू, ढाई दर्जन सस्पेंड









