MNREGA scheme:
कोलकाता, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने राज्य में 100 दिन की रोज़गार योजना (मनरेगा) को फिर से शुरू करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के 18 जून के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार की अपील खारिज करते हुए साफ कहा कि उसे निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं दिखती।
अनियमितताओं की जांच करा सकता है केंद्रः
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट ने पहले ही कहा था कि अगर राज्य में योजना के संचालन में कुछ अनियमितताएं हुई हैं, तो भी यह पूरे कार्यक्रम को ठप करने का औचित्य नहीं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि केंद्र सरकार अनियमितताओं की जांच स्वतंत्र रूप से कर सकती है, लेकिन गरीब ग्रामीण परिवारों की आजीविका को इस बहाने नहीं छीना जा सकता।
यह है मामलाः
दिसंबर 2021 में केंद्र ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत बंगाल को फंड भेजना रोक दिया था। केंद्र ने यह कदम बड़े पैमाने पर कथित भ्रष्टाचार और फर्जी लाभार्थियों के मामलों का हवाला देकर उठाया था। इस निर्णय के बाद राज्य में 2022 से परियोजनाएं ठप पड़ गईं।
राज्य का दावा-1.16 लाख करोड़ रुपये बकायाः
राज्य सरकार का दावा है कि अप्रैल 2022 से अब तक केंद्र पर करीब 1.16 लाख करोड़ रुपये का बकाया है, जिसमें से केवल श्रमिक मजदूरी ही लगभग 2,744 करोड़ रुपये बताई जाती है। वहीं, केंद्र का तर्क था कि उसने यह कार्रवाई मनरेगा अधिनियम की धारा 27 के तहत की, जो फंड के दुरुपयोग पर रोक लगाने और जांच कराने की शक्ति देती है।
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