Allahabad High Court:
नई दिल्ली, एजेंसियां। 4 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से जस्टिस प्रशांत कुमार को उनके रिटायरमेंट तक आपराधिक मामलों की सुनवाई से हटाने की सिफारिश की थी। साथ ही उन्हें एक सीनियर जज के साथ डिवीजन बेंच में बैठाने का निर्देश भी दिया गया।
M/s Shikhar Chemicals नामक मामले से जुड़ी
इस आदेश की पृष्ठभूमि M/s Shikhar Chemicals बनाम उत्तर प्रदेश राज्य नामक मामले से जुड़ी है, जिसमें एक दीवानी विवाद को लेकर दर्ज आपराधिक शिकायत पर सुनवाई हुई थी। जस्टिस प्रशांत कुमार ने यह कहते हुए आरोपी की याचिका खारिज कर दी कि वैकल्पिक उपाय के रूप में आपराधिक अभियोजन संभव है। सुप्रीम कोर्ट ने इस राय को गंभीर मानते हुए जस्टिस कुमार के खिलाफ तीखी टिप्पणी की।
13 जजों का विरोध:
बता दें हाईकोर्ट के 13 जजों ने इस पर आपत्ति जताई है और हाईकोर्ट की स्वतंत्रता व प्रशासनिक अधिकार को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार सुप्रीम कोर्ट का आदेश बिना नोटिस के आया।इसमें जस्टिस प्रशांत कुमार पर तीखी और अनुचित टिप्पणियां की गईं। सुप्रीम कोर्ट का प्रशासनिक क्षेत्राधिकार हाईकोर्ट तक नहीं फैलता। फुल कोर्ट को यह तय करना चाहिए कि ऐसे आदेशों को लागू किया जाए या नहीं। यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, लेकिन अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पत्र में सभी 13 जजों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं।
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