सितंबर में ही क्यों झारखंड विधानसभा चुनाव कराना चाहता है आयोग [Why does the Commission want to hold Jharkhand Assembly elections in September only?]

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रांची। निर्वाचन आयोग झारखंड विधानसभा चुनाव कराने के लिए बेताब है। सूचना आ रही है कि झारखंड विधानसभा चुनाव सितम्बर में ही खत्म हो जायेंगे। मगर कैसे? क्योंकि सितम्बर तो बस 37 दिनों बाद ही आ जायेगा।

अभी तो निर्वाचन आयोग ने न तो चुनाव की तिथियों की घोषणा की है, और न ही अभी आदर्श आचार संहिता लागू है।

20 अगस्त को निर्वाचन आयोग झारखंड के मतदाताओं की अंतिम मतदाता सूची जारी करेगा। तो क्या उसके बाद झारखंड के चुनाव की तिथियां घोषित हो जायेंगी?

2024 के शेष बचे कुछ महीनों में निर्वाचान आयोग को चार राज्यों, झारखंड, महाराष्ट्र, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव कराने हैं। हालांकि चारों राज्यों के विधानसभा का कार्यकाल अलग-अलग समय पर समाप्त हो रहा है।

लेकिन खबर है कि निर्वाचन आयोग इन चारों राज्यों में एक साथ चुनाव सम्पन्न कराना चाहता है। साल के आखिरी चार महीने पर्व-त्यौहारों को लेकर काफी अहम होते हैं।

इन चार महीनों में नवरात्रि, दशहरा, दीपावली, छठ आदि तो पड़ते ही है। फिर साल के आखिरी दिनों में क्रिसमस और गुरु पर्व की भी धूम रहती है।

इन सभी राज्यों में अक्टूबर से दिसम्बर के बीच चुनाव होते आ रहे हैं। तो फिर निर्वाचन आयोग पहले चुनाव क्यों कराना चाहता है?

कुछ दिनों पहले जब झारखंड में अक्टूबर महीने में चुनाव कराये जाने की चर्चा शुरू हुई थी तब झामुमो ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि अगर पर्व के दिनों में निर्वाचन आयोग ने चुनाव कराया तो न सिर्फ इसका विरोध होगा, बल्कि पार्टी आन्दोलन करेगी।

खबर यह भी है कि इस बार झारखंड में तीन चरणों में ही चुनाव सम्पन्न होंगे। तो इतने कम समय में चुनाव कैसे सम्पन्न होंगे? इसका जवाब पिछले विधानसभा चुनाव की तिथियों में छुपा है।

2019 में जब विधानसभा चुनाव हुए थे तब आदर्श आचार संहिता 1 नवम्बर को लागू हुई थी। पहले चरण के चुनाव की अधिसूचना 6 नवम्बर को, दूसरे चरण के चुनाव की अधिसूचना 11 नवम्बर को और तीसरे चरण की अधिसूचना 16 नवम्बर को जारी हुई थी।

झारखंड में पहले तीन चरण के मतदान 30 नवम्बर, 7 दिसम्बर और 12 दिसम्बर हो हुए थे। तो कुल मिला कर 42 दिनों में झारखंड के तीन चरणों का मतदान सम्पन्न हुआ था।

अगर निर्वाचन आयोग, जैसी की खबर है, 22 या 24 अगस्त को चुनाव तिथियों की घोषणा कर सकता है। अगर 22 अगस्त को आदर्श आचार संहिता लागू कर दी जाये तो पिछले विधानसभा की तरह 42 दिनों में इस बार का चुनाव 7 अक्टूबर तक सम्पन्न हो पायेगा।

3 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि शुरू हो रही है। दशहरे की धूम षष्ठी से शुरू होती है। तो इस बार नवरात्रि की षष्ठी 8 अक्टूबर तो पड़ेगी। अब बड़ा सवाल है कि क्या 7 अक्टूबर तक निर्वाचन आयोग चुनाव सम्पन्न कराना चाहता है।

जानकारी के मुताबिक चुनाव आयोग फिलहाल दो विकल्पों पर विचार कर रहा है। पिछली बार 30वें दिन पहले चरण का मतदान हुआ था।

अगर 22 अगस्त को आदर्श आचार संहिता लागू होती है, तो उस हिसाब से 30वां दिन 19 सितम्बर को पड़ेगा।

यानी पहले चरण का चुनाव 19 सितम्बर को कराने के बाद 5-5 दिन के अंतर पर चुनाव कराया जाये तो दूसरे चरण का मतदान 24 सितम्बर और तीसरे चरण का चुनाव 29 सितम्बर को सम्पन्न हो सकता है।

दूसरा विकल्प यह है कि तीन के बदले दो चरणों में ही झारखंड का चुनाव कराया जाये। यहां ध्यान देने वाली बात है कि झारखंड में तो 81 सीटों पर चुनाव होना है, वहीं महाराष्ट्र की 288 सीटों का मतदान एक ही चरण में सम्पन्न होता है।

फिलहाल सारी बातें चुनाव आयोग पर निर्भर हैं। इतना जरूर है कि झारखंड विधानसभा चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग काफी रेस है।

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