दलबदलुओं को झारखंड की जनता ने नकारा [The people of Jharkhand rejected the turncoats]

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रांची। झारखंड की जनता ने दलबदलुओं को नकार दिया है। इस चुनाव में पाला बदलकर दूसरे दलों से चुनाव लड़नेवाले नेताओं को हार का सामना करना पड़ा है।

इनमें गीता कोड़ा, जेपी पटेल, सीता सोरेन, ममता भुइयां शामिल हैं। नेता एक अदद टिकट के लिए अपनी पार्टी निष्ठा को ताक पर रखकर दूसरे दलों में शामिल हो जाते हैं।

ऐसे दलबदलुओं के लिए झारखंड की जनता ने नकार दिया है। झारखंड की जनता ने संदेश दिया है कि ऐसे नेता उन्हें पसंद नहीं हैं।

इतना ही, नहीं पार्टी से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने वालों को भी झारखंड की जनता ने आईना दिखा दिया है।

इनमें झामुमो से बगावत कर लोहरदगा से चुनाव लड़नेवाले चमरा लिंडा और झामुमो से ही बगावत कर राजमहल से चुनाव लड़ने वाले लोबिन हेब्रम को जनता ने नकार दिया।

गीता कोड़ा

पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा लोकसभा आम चुनाव 2024 से ठीक पहले झारखंड से दल बदलने वाली बड़ी नेता थीं।

2019 के लोकसभा चुनाव में जीत के बाद गीता कोड़ा कांग्रेस और गांधी परिवार की करीबी बन गई थीं।

लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले गीता कोड़ा भाजपा में शामिल हो गईं और उन्हें सिंहभूम से टिकट भी मिल गया।

गीता कोड़ा के अचानक कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने से सदमे में आई कांग्रेस को अपनी जीती हुई सीट इंडिया ब्लॉक की सहयोगी झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए छोड़नी पड़ी।

नतीजा यह हुआ कि गीता कोड़ा को पूर्व मंत्री जोबा मांझी के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा।

सीता सोरेन

इधर शिबू सोरेन की बड़ी बहू और जामा से तीन बार की विधायक रहीं सीता सोरेन ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले झामुमो छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था।

2019 के विजयी उम्मीदवार सुनील सोरेन का घोषित टिकट काटकर भाजपा ने दुमका से सीता सोरेन को टिकट दिया।

सीता सोरेन के खिलाफ झामुमो ने अपने पुराने और वफादार अनुभवी नेता नलिन सोरेन को मैदान में उतारा।

नतीजा यह हुआ कि शिबू सोरेन के बीमार होने और हेमंत सोरेन के जेल में होने के बावजूद झामुमो ने यह सीट भाजपा से छीन ली।

झामुमो उम्मीदवार के तौर पर नलिन सोरेन ने 5,47,370 वोट पाकर सीता सोरेन को 22,527 वोटों से हराया।

जयप्रकाश भाई पटेल

इधर पूर्व मंत्री और मांडू से विधायक जयप्रकाश भाई पटेल की अति महत्वाकांक्षा इस बार मतदाताओं को पसंद नहीं आई।

जनता में यह संदेश गया कि जयप्रकाश भाई पटेल के लिए पार्टी की नीति, सिद्धांत और निष्ठा से ज्यादा उनकी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा मायने रखती है।

पिता की मौत के बाद उन्होंने झामुमो पार्टी छोड़ दी। जिस झामुमो ने उन्हें उपचुनाव जिताकर मंत्री बनाया, उसे छोड़ वे भाजपा में शामिल हो गए और जब भाजपा ने उन्हें लोकसभा का टिकट नहीं दिया तो चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में शामिल हो गए। उन्हें भी जनता ने नकार दिया है।

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