रांची : अंग्रेजी शासनकाल में भारत के वायसराय लार्ड इरविन के रांची आगमन के उपलक्ष्य में बनायी गयी ऐतिहासिक इमारत रांची सदर अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग को नयी जिंदगी दी जा रही है। करीब तीन करोड़ की लागत से इस दो मंजिला भवन का कंजरवेशन का काम किया जा रहा है। इस भवन की आधारशिला बिहार और ओडिशा के तत्कालीन गवर्नर सर ह्यूज लैंसडाउन स्टीफेंसन ने वर्ष 1928 में रखी थी और दो साल बाद वर्ष 1930 में यह बनकर तैयार हो गया था।
सर ह्यूज लैंसडाउन स्टीफेंसन ब्रिटिश कोलोनियल एडमिनिस्ट्रेटर थे जो सात अप्रैल 1927 से सात अप्रैल 1932 तक बिहार और ओडिशा के गवर्नर रहे थे। इसके बाद दिसंबर 1932 से मई 1936 तक वे बर्मा के गवर्नर रहे थे। इस भवन को बनवाने में राजा बलदेव दास बिरला ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। उस समय इस भवन को बनवाने में करीब 20 लाख रुपये की लागत आयी थी। दो मंजिला इस भवन का क्षेत्रफल करीब 15000 स्कवायर फीट है।
जनवरी में पूरा हो जायेगा कंजरवेशन का कार्य
सदर अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग का कंजरवेशन कार्य करा रहे आइटीआरएचडी के स्टेट एंबेसडर श्रीदेव सिंह ने बताया कि करीब तीन करोड़ की लागत से संरक्षित की जा रही इस बिल्डिंग का संरक्षण कार्य जनवरी 2023 में पूरा कर लिया जायेगा। यह भवन कोलोनियल आर्किटेक्चर का शानदार नमूना है और इसके दीवारों की मोटाई 20 से लेकर 40 इंच तक है।
भवन का निर्माण कार्य सुर्खी चूने और लाल ईंटों से किया गया था और इसलिए इसका संरक्षण भी इसी तर्ज पर किया जा रहा है। इसके संरक्षण के लिए राजमहल के अलावा कई अन्य स्थानों से कुशल कारीगरों को लाया गया है। इस भवन के संरक्षण के लिए भवन में उग आये पेड़ों और उसकी जड़ों को हटाया जा चुका है। इसके साथ ही भवन में किया गया सीमेंट का प्लास्टर भी हटाया जा चुका है। बारिश के बावजूद भवन का संरक्षण कार्य बड़ी तेजी से किया जा रहा है।
इसे वीमेंस हॉस्पिटल के रूप में बनाया गया था
गौरतलब है कि आजादी से पहले अंग्रेजों की ओर से सदर हॉस्पिटल का निर्माण किया गया था। इसे वीमेंस हॉस्पिटल के रूप में बनाया गया था और लंबे अर्से तक इस भवन में स्त्री और प्रसूति रोग विभाग संचालित किया जाता रहा था।
करीब 92 वर्ष पहले बना यह भवन आज भी काफी सुरक्षित है, क्योंकि इसकी दीवारें 40 इंच मोटी है। सुरखी और चूना से छत की ढलाई की गई है। गर्मी के मौसम में भी इस भवन में ठंडक रहती है। सदर हॉस्पिटल के पुराने भवन को धरोहर के रूप में संरक्षित किया जाएगा।








