रांची : मैदानी पट्टी के बच्चों को पेड़ ऑक्सीजन देता है, और भोजन मॉल, जबकि आदिवासी बच्चे को पेड़ पहले भोजन देता है और मॉल उनके भोजन के साधन पेड़ों को काटता है। बुधवार को ये बातें प्रदेश छात्र जदयू के राज्य प्रभारी डॉ विनय भरत ने कहीं। वे विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कार्यकारिणी समिति की बैठक में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि आज आदिवासियों के हक और अधिकार की लड़ाई को तेज करने की जरूरत है। वर्षों से उन्हें हाशिये पर रखने की साजिश होती रही है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। आज आदिवासी समाज जाग चुका है और उनमें जागरूकता आयी है। मौके पर मौजूद छात्र जदयू के राज्य सचिव मोहम्मद आसिफ इकबाल ने कहा कि वक्त आ गया है कि हम युवा भगवान बिरसा, सिद्धू कान्हू, चांद भैरव, फूलो झानो, मरांग गोमके जय पाल सिंह मुंडा और डॉ राम दयाल मुंडा जैसी विभूतियों को अपना नायक बनाएं और हाशिए के समाज को आगे ले जाएं।
इस मौके पर छात्र जदयू ने विश्वविद्यालय में कार्यरत आदिवासी सफाई कर्मी उषा लकड़ा की बच्ची 9 वीं कक्षा की छात्रा सृष्टि कुमारी को गोद लिया और उसकी पूरी स्कूली पढ़ाई के खर्च का ज़िम्मा लिया। उसके पढ़ाई के खर्च की पहली किश्त डॉ विनय भरत और अध्यक्ष रंजन कुमार ने दी। इस मौके पर डॉ मुकेश यादव ने कहा कि सफाईकर्मी विश्वविद्यालय की रीढ़ होते हैं और उनका सम्मान संविधान निर्माताओं के सपनों को पूरा करता है।
इस मौके पर छात्र जदयू के रंजन कुमार, आसिफ इकबाल, डॉ मुकेश यादव, दीपक , अमन साहू, सुमित , गौरव, अजय, तेजू मिर्धा, तथा विश्वविद्यालय की सफाई कर्मी उषा लकड़ा, जयंती लकड़ा, अंजलि कच्छप तथा अन्य मौजूद थे।







