झारखंड में फिर सुखाड़ के संकेत [Signs of drought again in Jharkhand]

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रांची। झारखंड में मानसून कमजोर पड़ गया है। इससे एक बार फिर सुखाड़ के संकेत मिल रहे हैं। किसानों के चेहरे पर मायूसी छायी है।

बंगाल की खाड़ी में सर्कुलेशन नहीं बनने से बारिश रुक गई है। मानसून कमजोर पड़ने के साथ ही गर्मी भी बढ़ गई है। रांची सहित राज्य के अधिकतर जिलों में चिलचिलाती धूप दिख रही है।

डालटनगंज का पारा 38.4 डिग्री पहुंच गया। मौसम विज्ञान केन्द्र रांची के अनुसार मानसून रोजाना एक्टिव नहीं रहता है। इसका साइकिल चलता है। फिलहाल किसी तरह का सिस्टम नहीं बन रहा है, इसलिए मानसून कमजोर है।

11 जुलाई से एक बार फिर मानसून एक्टिव होने की संभावना है। बादल बनेंगे और कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है।

इसके बाद तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट होने की भी संभावना है। गुरुवार को देवघर, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़, साहिबगंज, धनबाद, रांची, खूंटी, बोकारो, गुमला और हजारीबाग में भारी बारिश की संभावना है।

रांची में अगले 15 जुलाई तक बादल छाने और हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है। इस दौरान कुछ स्थानों पर वज्रपात की भी चेतावनी दी गई है।

इधर, पिछले 24 घंटे में राज्य में कहीं-कहीं पर हल्के दर्जे की बारिश हुई। सबसे अधिक बारिश पूर्वी सिंहभूम के गुड़ाबंधा में 15 एमएम दर्ज की गई। सबसे अधिक उच्चतम तापमान सरायकेला में 37.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया

51 प्रतिशत कम हुई बारिश

झारखंड में अभी तक सामान्य से 51% कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुसार 1 जून से 9 जुलाई तक सामान्य वर्षा 274.9 एमएम होनी चाहिए थी, पर मात्र 135 एमएम बारिश हुई है।

सबसे खराब स्थिति चतरा की है। चतरा में सामान्य वर्षा 245.4 एमएम होनी चाहिए थी, पर मंगलवार तक 72.1 एमएम हुई है। यहां 71% कम बारिश हुई है।

69% कम बारिश के साथ सरायकेला दूसरे और 67% कम बारिश के साथ पाकुड़ तीसरे स्थान पर है।

गोड्डा अच्छी स्थिति में है। यहां 196 एमएम बारिश हो चुकी है। मात्र 21% की कमी है। सबसे खराब स्थिति किसानों की है। खेतों में दरारें आ रही हैं। बीज सूख रहे हैं।

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