रांची। साहिबगंज एसपी नौशाद आलम ईडी की ओर से दूसरा समन भेजे जाने के बाद मंगलवार को क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचे। ईडी के अधिकारी उनसे जवाब-तलब कर रहे हैं। उन पर गवाहों को भड़काने का आरोप है।
इसी वजह से ईडी ने उन्हें समन भेज बुलाया था। पहली बार भेजे गए समन में उन्हें 22 नवंबर को हाजिर होने को कहा गया था, लेकिन वे नहीं पहुंचे थे। उन्होंने ईडी से समय की मांग की थी। 22 नवंबर को ही ईडी ने दूसरा समन जारी किया और 28 नवंबर को हाजिर होने को कहा।
यह है मामला
साहिबगंज में अवैध खनन के मामले में ईडी ने विजय हांसदा को अपना गवाह बनाया था। उसने ईडी को दिए गए अपने बयान में साहिबगंज में हो रहे अवैध खनन के मामले में पंकज मिश्रा की भूमिका की विस्तृत जानकारी दी थी। उसने खुद भी नींबू पहाड़ पर हो रहे अवैध खनन के मामले में एक प्राथमिक की दर्ज कराई थी।
साथ ही जेल में रहने के दौरान ही नींबू पहाड़ प्रकरण में पुलिस जांच पर संदेश जताते हुए मामले में स्वतंत्र एजेंसी से जांच करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन जमानत मिलने के बाद उसने हाई कोर्ट में आईए दाखिल कर अपने पिटीशन को वापस लेने की मांग की।
याचिका वापस की दी थी दलील
हाईकोर्ट में याचिका वापस करने को लेकर उसने दलील दी थी। जिसमें उसने कहा था कि जेल में रहने के दौरान उसकी जमानत याचिका दायर करने के लिए वकालतनामा पर दस्तक कराया गया था, लेकिन धोखे से नींबू पहाड़ मामले में जांच की मांग को लेकर याचिका दायर कर दी। न्यायालय ने विजय हांसदा द्वारा जांच की मांग करने, बाद में मुकरने की घटना को गंभीरता से लिया।
कोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया। उसी दिन विजय हांसदा ने सीबीआई के गवाह मुकेश यादव और अशोक यादव के खिलाफ धुर्वा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।
ईडी पर लगाए गए थे आरोप
धुर्वा थाने में दर्ज प्राथमिकी में ईडी के अधिकारियों पर भी आरोप लगाए गए थे। मुकेश यादव ने धुर्वा थाने में दर्ज प्राथमिक को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
हाईकोर्ट ने थाने में दर्ज प्राथमिकी के अभियुक्तों पर पीड़क कार्रवाई करने पर रोक लगा दी। इस बीच जेल में बंद पंकज मिश्रा ने विजय हांसदा की याचिका पर दिए गए सीबीआई जांच के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।









