एसीबी का दावा- 38 करोड़ नहीं, 100 करोड़ रूपए से ज्यादा का है शराब घोटाला [ACB claims- Liquor scam is not worth 38 crores but more than 100 crores]

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Liquor Scam:

रांची। एसीबी का दावा है कि झारखंड में 38 करोड़ नहीं बल्कि 100 करोड़ से ज्यादा का शराब घोटाला हुआ है। एसीबी ने विशेष अदालत में यह दावा किया है।

इसीलिए एसीबी ने आइएएस विनय चौबे और योगेंद्र सिंह से पूछताछ के लिए कोर्ट से उनकी रिमांड मांगी थी। एसीबी के विशेष लोक अभियोजक आलोक कुमार ने कहा कि ये दोनों उच्च पद पर थे।

जो भी अनियमितता हो रही थी, उनकी जानकारी में थी। इस मामले में 27 सितंबर 2024 को प्रारंभिक जांच के लिए पीई कांड संख्या 3/24 दर्ज किया गया। जांच में इनके खिलाफ कई तथ्य मिले, जिसकी और जांच की जरूरत है।

यह गड़बड़ी 38 करोड़ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि 100 करेाड़ से ज्यादा का घोटाला है। इसलिए इनसे पू्छताछ की जरूरत है। पूछताछ में एसीबी के साथ ऑडिट करने वाले सीए भी होंगे। इस पर कोर्ट ने दो दिन की रिमांड मंजूर करते हुए कहा कि विनय चौबे को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराते रहें।

Liquor Scam: एसीबी को मिले चार अचल संपत्ति के दस्तावेज:

एसीबी ने विनय चौबे और उनके परिवार के सदस्यों की अचल संपत्ति को भी खंगालना शुरू कर दिया है। रजिस्ट्री ऑफिस से मिले दस्तावेज से पता चला है कि 2006 से 2021 के बीच विनय चौबे, उनकी पत्नी और संबंधियों के नाम पर चार अचल संपत्ति खरीदी गई है।

इसमें जमीन और फ्लैट शामिल हैं। एसीबी आकलन कर रहा है कि इस संपत्ति की वर्तमान में क्या कीमत है।

Liquor Scam: एसीबी ने दो लोगों से की पूछताछः

एसीबी ने पूछताछ के लिए धनंजय कुमार और उपेंद्र शर्मा को भी बुलाया था। दोनों से पूछताछ की गई। दोनों ही चौबे के करीबी हैं। इन्हें चौबे के बैंक खाते से संबंधित डिटेल्स लेने के लिए बुलाया गया था।

Liquor Scam: चौबे के रिश्तेदारों से भी भी पूछताछः

एसीबी ने विनय चौबे के रिश्तेदार क्षिपिज त्रिवेदी को भी पूछताछ के लिए एसीबी मुख्यालय बुलाया है। वहीं कारोबारी विनय कुमार सिंह से 30 मई को पूछताछ होनी है। एसीबी के डीजी अनुराग गुप्ता खुद इस मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

Liquor Scam: एसीबी ने तैयार किये सवालः

एसीबी ने दोनों से पूछताछ के लिए सवालों की सूची तैयार कर ली है। इनसे पूछा जाएगा कि उनके कार्यकाल में किस आधार पर दो अयोग्य प्लेसमेंट एजेंसियों को ठेका देकर लाभ पहुंचाया गया। दो प्लेसमेंट एजेंसियों ने फर्जी बैंक गारंटी दी थी।

इसके खुलासे के बाद भी उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। वे काम कैसे करते रहे। क्योंकि इन पर सरकार को 38.44 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान पहुंचाने का आरोप है।

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