JSSC-CGL paper leak:
रांची। जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में कथित पेपर लीक मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में बीते तीन दिनों से जारी है। शुक्रवार को हाईकोर्ट में फिर सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पूर्व में पारित अंतरिम आदेश को बरकरार रखने का निर्देश दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी।
सरकार का पक्ष-पेपर लीक के सबूत नहीः
सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया कि अब तक की जांच में प्रश्नपत्र लीक होने के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि सीआईडी जांच में भी पेपर लीक का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। पिछले वर्षों के कुछ प्रश्न जरूर दोहराए गए हैं, लेकिन इसे पेपर लीक नहीं कहा जा सकता। कई तथाकथित “गेस क्वेश्चन” को गलत तरीके से लीक का रूप दे दिया गया है।
वित्त विभाग के गिरफ्तार अफसर से भी हो चुकी पूछताछः
महाधिवक्ता ने बताया कि इस मामले में वित्त विभाग के अधिकारी संतोष मस्ताना से भी पूछताछ की गई, लेकिन उससे भी प्रश्नपत्र लीक होने की कोई पुष्टि नहीं हुई।
हस्तक्षेपकर्ता की ओर से भी पक्ष रखा गयाः
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता की ओर से भी पक्ष रखा गया। जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल और अधिवक्ता प्रिंस कुमार उपस्थित रहे। इस जनहित याचिका को प्रकाश कुमार एवं अन्य ने दायर किया है, जिसमें मांग की गई है कि सीजीएल परीक्षा रद्द की जाए और पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि परीक्षा में पेपर लीक, प्रश्नपत्र की सील खुलने और बड़ी संख्या में पुराने प्रश्नों को दोहराने जैसी गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।
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