Ranchi Smart City:
रांची। झारखंड की राजधानी रांची को स्मार्ट सिटी बनाने की योजना लगभग 9 साल पहले शुरू हुई थी। कई सरकारें आईं और गई , लेकिन परियोजना अभी भी अधूरी है। इसके लिए शुरुआती दौर में हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचइसी) ने 656 एकड़ जमीन दी थी। वर्तमान में आर्थिक संकट से जूझ रहा एचइसी अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए पुनः 500 एकड़ जमीन बेचने का निर्णय ले चुका है।एचइसी के अधिकारियों के अनुसार कंपनी की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट ने पहले ही एचइसी से 500 एकड़ भूमि की मांग की थी, जिसे अब औपचारिक रूप से राज्य सरकार के समक्ष रखा गया है। एचइसी ने अपने आवासीय परिसर में खाली पड़ी जमीन की पहचान की है और उसके कागजात दुरुस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। जहां-जहां भूमि पर अतिक्रमण है, उसे हटाने की जिम्मेदारी भी एचइसी खुद उठाएगा।
पूर्व में एचइसी ने जमीन की कीमत क्या रखा था?
पूर्व में एचइसी ने जमीन की कीमत 11.50 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तय की थी। यदि 500 एकड़ भूमि बेची जाती है, तो एचइसी को लगभग 5500 करोड़ रुपये मिलेंगे। इस पैसे का उपयोग प्लांटों के पुनरुद्धार, बकाया वेतन भुगतान और अन्य देनदारियों को निपटाने में किया जाएगा।
इधर, वेतन न मिलने से नाराज एचइसी के सप्लाई कर्मियों ने एफएफपी प्लांट में उत्पादन कार्य बंद कर दिया। दो दिन पहले ही एचइसी के निदेशक ने प्लांट का निरीक्षण किया था, जहां कर्मियों ने उनसे वेतन भुगतान पर सवाल उठाए, लेकिन संतोषजनक उत्तर न मिलने पर वे आक्रोशित हो उठे। कर्मियों का कहना है कि प्रबंधन उत्पादन बढ़ाने को कहता है, लेकिन उनका वेतन अगस्त 2023 से बकाया है। वे स्पष्ट रूप से बताते हैं कि जब तक वेतन भुगतान की निश्चित तिथि नहीं बताई जाएगी, तब तक उत्पादन शुरू नहीं होगा।
एचइसी द्वारा जमीन आवंटन का इतिहास:
अब बताते है एचइसी द्वारा जमीन आवंटन के इतिहास के बारे जो कि काफी बड़ा है। जानकारी के अनुसार निगम स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को अब तक 647.08 एकड़ भूमि दे चुका है। इसके अलावा राज्य सरकार को 2342.03 एकड़, सीआईएसएफ को 158 एकड़ और विभिन्न संस्थानों को लीज पर 313.31 एकड़ जमीन दी गई है। लगभग 73.05 एकड़ भूमि पर विभिन्न जगहों पर अतिक्रमण है। वर्तमान में एचइसी के पास कुल 3666 एकड़ भूमि शेष है, जिसमें से 500 एकड़ स्मार्ट सिटी को देने का प्रस्ताव है।कर्मियों का कहना है कि यदि प्रबंधन जमीन बेचकर धन जुटाने की नीति अपनाता है तो वे इसका भी विरोध करेंगे। कार्य ठप होने से एफएफपी में एनसीएल के लिए बन रहे उपकरणों का निर्माण भी प्रभावित हुआ है। प्लांट के महाप्रबंधक ने कर्मियों से चर्चा कर उत्पादन शुरू करने को कहा, लेकिन कर्मियों ने स्पष्ट किया कि वेतन से जुड़े निर्णय के बाद ही कार्य शुरू होगा।







