RIMS helpless:
रांची। राज्य सरकार और रिम्स (RIMS) प्रबंधन पर नन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) लेने के बावजूद निजी प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई करने की गंभीर आलोचना हो रही है। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब आयकर विभाग की छापेमारी में डॉक्टरों की संदिग्ध आमदनी का खुलासा हुआ, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
रिम्स के डॉक्टर हेमंत नारायण
2018 में आयकर विभाग ने रिम्स के डॉक्टर हेमंत नारायण और उनकी पत्नी डॉ. गीता कुमारी के परिसरों पर सर्वे किया। रिपोर्ट में सामने आया कि गीता कुमारी, जो राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं, ने लगभग 90 लाख रुपये की सालाना आय दिखाई, जबकि हेमंत नारायण ने सिर्फ 17-18 लाख रुपये। यह अंतर जांच का विषय बना, क्योंकि गीता कुमारी की अधिक आय के पीछे दोनों के मिलकर निजी प्रैक्टिस करने की आशंका जताई गई।
रिम्स निदेशक ने आयकर विभाग को लिखा पत्र
रिम्स निदेशक ने आयकर विभाग को पत्र लिखकर हेमंत नारायण के प्रैक्टिस से संबंधित जानकारी मांगी, लेकिन यह पत्र आयकर विभाग तक पहुंचा ही नहीं। आयकर विभाग ने अपने अधिकार क्षेत्र में रहते हुए केवल टैक्स और जुर्माना वसूला, लेकिन डॉक्टर की प्रैक्टिस को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की।
स्वास्थ्य विभाग ने विशेष जांच समिति किया गठित
बाद में स्वास्थ्य विभाग ने विशेष जांच समिति गठित की, जिसमें सचिव चंद्रकिशोर उरांव और दो डॉक्टर सदस्य थे। समिति ने डॉक्टरों के घर जाकर जांच की, रजिस्टर में एंट्री की और पूछताछ की। रिपोर्ट भी सौंपी गई, लेकिन कार्रवाई रिम्स के अधिकार क्षेत्र में आने के कारण मामला डॉक्टर बिरादरी की अंदरूनी मिलीभगत में उलझकर दबा दिया गया।
झारखंड हाईकोर्ट के आदेश और बार-बार उठ रहे मुद्दों के बावजूद सरकार और रिम्स की निष्क्रियता इस बात की ओर इशारा करती है कि इच्छाशक्ति की कमी के कारण आज तक एक भी दोषी डॉक्टर पर कार्रवाई नहीं हो सकी।
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