Netaji Subhas Chandra Bose
रांची। आज 23 जनवरी 2026 को देश नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती मना रहा है। इस अवसर पर झारखंड की राजधानी रांची से जुड़ी नेताजी की स्मृतियां एक बार फिर चर्चा में हैं। रांची के लालपुर स्थित आयकत परिवार का घर आज भी उस ऐतिहासिक दौर की गवाही देता है, जब नेताजी ने वर्ष 1940 में यहां प्रवास किया था। यह घर केवल एक आवास नहीं, बल्कि भारत की आज़ादी की लड़ाई का जीवंत स्मारक बन चुका है।
विष्णु आयकत कौन है?
आयकत परिवार की तीसरी पीढ़ी के विष्णु आयकत आज भी उस समय से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों और वस्तुओं को सहेज कर रखे हुए हैं। घर का वही बरामदा और कुर्सी आज भी मौजूद है, जहां नेताजी घंटों बैठकर आंदोलन की रणनीतियों पर चर्चा करते थे। दिसंबर 1940 में नेताजी चार दिनों तक इसी घर में ठहरे थे और कई महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल हुए थे। इतिहास के अनुसार, नेताजी दो बार रांची आए थे—दिसंबर 1940 और मार्च 1941 में।
आयकत परिवार की देशभक्ति का उदाहरण फणिंद्र नाथ आयकत के फैसले से मिलता है, जिन्होंने नेताजी का साथ देने के लिए अंग्रेजों की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़ दी थी। इतना ही नहीं, उन्होंने आजाद हिंद फौज के लिए 40 हजार रुपये का दान भी दिया, जो उस समय एक बड़ी राशि थी। यह कदम ब्रिटिश शासन के खिलाफ खुला विरोध था।
क्या रहा रांची का योगदान?
रांची का योगदान यहीं तक सीमित नहीं रहा। डॉ बीरेंद्र नाथ रॉय, जो आजाद हिंद फौज में मेजर थे, और यूनियन क्लब में स्थापित 8.5 फीट ऊंची नेताजी की प्रतिमा, कांटाटोली का नेताजी नगर ये सभी इस बात के प्रमाण हैं कि रांची में नेताजी की विरासत आज भी जीवित है।नेताजी जयंती 2026 के अवसर पर यह स्पष्ट है कि रांची केवल एक शहर नहीं, बल्कि आज़ादी की लड़ाई का एक जीवंत अध्याय है, जहां इतिहास आज भी सांस लेता है।
