Municipal bodies reservation cap: नगर निकायों में 50% से अधिक आरक्षण नहीं

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Municipal bodies reservation cap:

रांची। झारखंड के नगर निकायों की आबादी के अनुसार वार्डों का आरक्षण तय होगा। इसी प्रकार झारखंड की आबादी के हिसाब से नगर निगम के मेयर, नगर परिषद और नगर पंचायतों के अध्यक्षों का आरक्षण निश्चित होगा। हालांकि यह किसी भी स्थिति में 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। इस फार्मूले पर सहमति बन गई है। ट्रिपल टेस्ट से सामने आए ओबीसी-1 और ओबीसी-2 की आबादी को अधिसूचित करने के लिए बनी कमेटी ने नगर विकास विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसी कमेटी ने एसटी, एससी और जनरल कोटे की जनसंख्या भी अलग-अलग की है।

जनसंख्या के आधार पर तय होगा आरक्षणः

इस रिपोर्ट के आधार पर नगर विकास विभाग जनसंख्या की अधिसूचना जारी करेगा। दो-तीन दिन के अंदर नगर विकास विभाग यह नोटिफिकेशन जारी कर देगा। फाइल विभागीय सचिव को भेज दी गई है। विभाग यह अधिसूचना राज्य चुनाव आयोग को भेजेगा। इसके बाद वार्डों के आरक्षण का काम शुरू होगा।

2017 के परिसीमन के आधार पर ही चुनावः

इस बार नगर निकाय चुनाव वर्ष 2017 के परिसीमन के आधार पर ही होगा। निकाय क्षेत्रों के वार्डों का पुनर्गठन नहीं होगा। ऐसे में स्पष्ट है कि नगर निकायों और उनके वार्डों की सीमाओं में कोई परिवर्तन नहीं होगा। उनकी संख्या पूर्ववत ही बनी रहेगी।

किसे और कितना मिलेगा आरक्षणः

एसटी, एससी, ओबीसी-1 और ओबीसी-2 को मिलेगा आरक्षण।
किसी भी स्थिति में 50 प्रतिशत से अधिक वार्ड आरक्षित नहीं होंगे।
यदि नगर निकाय में 51 वार्ड हंस तो 25 वार्ड ही आरक्षित होंगे।
कुल वार्डों की संख्या आरक्षित होने के बाद एसटी,एससी, ओबीसी-1 और ओबीसी-2 के लिए वार्डों का आरक्षण तय होगा।

पहली बार ओबीसी-1 और ओबीसी – 2 के लिए सीटें होंगी तयः

राज्य में 48 शहरी निकाय क्षेत्र हैं, जहां ओबीसी ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट के बाद पहली बार ओबीसी-1 और ओबीसी-2 के लिए सीटें निर्धारित होंगी। पिछड़ा वर्ग आयोग की अनुशंसा पर नगर निकाय क्षेत्र में अधिकतम आरक्षण 50% होगा, जिसमें एसटी, एससी और ओबीसी-1, ओबीसी-2 के लिए सीटें निर्धारित होंगी। निकाय चुनाव नहीं होने के कारण राज्य में शहरी निकाय का कामकाज अधिकारी देख रहे हैं।

24 नवंबर को बतानी है चुनाव की तारीखः

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह 24 नवंबर को नगर निकाय चुनाव की तिथि बताए। निकाय चुनाव पर झारखंड हाईकोर्ट में 10 नवंबर को सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने राज्य में नगर निकायों के चुनाव न कराए जाने पर नाराजगी व्यक्त की थी। गौरतलब है कि जस्टिस आनंदा सेन की बेंच ने रांची नगर निगम की पूर्व पार्षद रोशनी खलखो की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के बाद 4 जनवरी 2024 को निर्देश दिया था कि राज्य के नगर निकाय चुनाव तीन सप्ताह के भीतर कराए जाएं। आदेश का अनुपालन नहीं होने पर कोर्ट में खलखो ने अवमानना याचिका दायर की है।

ऐसे निकालेंगे एसटी, एससी और ओबीसी का आरक्षण प्रतिशतः

मान लें कि एक ऐसा नगर निकाय क्षेत्र, जिसकी जनसंख्या 100 है। यदि वहां पर एसटी की आबादी 30 है, तो उसे 30 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। एससी की आबादी 10 है, तो उसे 10 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।
40 प्रतिशत के बाद बचे 10 प्रतिशत वार्डों को ओबीसी-1 और ओबीसी-2 में समानुपातिक ढंग से बांटा जाएगा।
इस हिसाब से आरक्षित किए जानेवाले 25 वार्ड में से 30 प्रतिशत एसटी, 10 प्रतिशत एससी और शेष बची सीटें ओबीसी-1 और ओबीसी-2 के हिस्से आएंगी। यदि उक्त निकाय क्षेत्र में एसटी, एससी या ओबीसी की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक है, तो फिर समानुपातिक ढंग से वार्डों को आरक्षित करते हुए उनकी संख्या निर्धारित होगी।

एसटी, एससी, ओबीसी-1 और ओबीसी-2 के आरक्षण का मानकः

वार्डों की जनसंख्या में से एसटी, एससी, बीसी-1 और बीसी-2 आबादी की पहचान करेंगे।
एसटी, एससी, बीसी-1 और बीसी-2 की सबसे अधिक आबादी वाला वार्ड घटते क्रम में आरक्षित होगा।

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