दयानंद राय
रांची : झारखंड के सरकारी स्कूलों के प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी अन्य कार्यों में चाहे जैसे भी हों पर उन्हें मुंशीगिरी में पारंगत होना ही होगा। क्योंकि झारखंड सरकार उनसे मिड डे मील की खाली बोरियों का हिसाब चाहती है। न सिर्फ हिसाब चाहती है बल्कि ये भी चाहती है कि वे सरकार की ओर से निर्धारित दर पर इसे बेचें और पैसा जमा करा दें। झारखंड सरकार का ये फरमान आने के बाद गिरिडीह जिले के प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी बोरियों की गिनती करने और उन्हें बेचकर पैसे जमा करने में जुट गए हैं। लेकिन झारखंड सरकार के शिक्षा विभाग के इस फरमान से शिक्षा विभाग की प्राथमिकता क्या है इसका पता चल गया है।
गिरिडीह जिले के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को भेजी गयी है चिठ्ठी
गिरिडीह के शिक्षा प्रसार पदाधिकारी ने इस बाबत जिले के सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों सह नोडल पदाधिकारी मिड डे मील कोषांग को एक चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में उनसे मिड डे मील की खाली चावल की बोरियों का प्रति बोरी 14.40 रुपये के हिसाब से बिक्री कर सरस्वती वाहिनी शिक्षा समिति के खाते में जमा करने को कहा गया है। प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों को वित्तीय वर्ष 2017-18 से लेकर 2022-23 तक की चावल की खाली बोरियों को बेचकर उसकी राशि का हिसाब देने को कहा गया है। चिट्ठी में इस कार्य को उच्च प्राथमिकता का बताया गया है, अर्थात प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के लिए यह सबसे जरूरी काम है।
कार्य पूरा न होने पर होगी अनुशासनिक कार्रवाई
चिट्टी में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को ये कहा गया है कि उन्हें पूर्व में ही इस बाबत रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया था, लेकिन उनकी ओर से रिपोर्ट नहीं आयी। ऐसे में तुरंत वे काम पूरा करके इसकी रिपोर्ट दें नहीं तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की जायेगी। विभाग की ओर से 24 अप्रैल को लिखी गयी चिट्ठी के बाद से जिले के शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों में हड़कंप है और वे सब काम छोड़कर खाली बोरियों की गिनती कर उन्हें बेचने और पैसा सरस्वती वाहिनी शिक्षा समिति के खाते में जमा करने की जुगत में लग गये हैं। गिरिडीह के अलावा अन्य जिलों के प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों को भी ऐसी ही चिट्ठी मिली है।







