Jharkhand AI misuse case
जमशेदपुर। झारखंड में एक नाबालिग छात्र ने साथी छात्रा का न्यूड वीडियो वायरल किया है। इसके लिए उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआइ का इस्तामल किया। संभवत यह इस तरह का झारखंड में पहला मामला है।
यह मामला झारखंड के जमशेदपुर का है। छात्र की उम्र महज 13 साल है और वह सातवीं कक्षा में पढ़ता है। वह उलीडीह थाना क्षेत्र स्थित एक स्कूल का छात्र है। उसने अपनी ही कक्षा की नाबालिग छात्रा की फर्जी न्यूड तस्वीर बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है।
पुलिस ने दर्ज किया केसः
इस मामले में छात्रा की मां ने आरोपी नाबालिग छात्र के खिलाफ उलीडीह थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। घटना 18 दिसंबर की है। शिकायत में बताया गया है कि आरोपी छात्र ने एआई तकनीक की मदद से उनकी नाबालिग बेटी की तस्वीर को आपत्तिजनक ढंग में एडिट किया और उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म स्नैपचैट और इंस्टाग्राम पर वायरल कर दिया। तस्वीर वायरल होने के बाद छात्रा और उनका परिवार मानसिक रूप से काफी परेशान है। पुलिस ने आरोपी नाबालिग के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
पुलिस जुटी जांच मेः
जांच इंस्पेक्टर चंदन कुमार कर रहे हैं। पुलिस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से तकनीकी साक्ष्य जुटाने के साथ-साथ यह भी जांच कर रही है कि तस्वीर कितने लोगों तक पहुंची और इसे किन-किन माध्यमों से शेयर किया गया।
इस संबंध में उलीडीह ओपी के थानेदार मो. शारिक अली ने बताया कि 7वीं के छात्र ने अपनी सहपाठी की तस्वीर को एआई के माध्यम से एडिट कर आपत्तिजनक बनाकर वायरल किया है। मामला दर्ज कर जांच की जा रही है।
सीबीएसई ने जारी किया है गाइडलाइनः
सीबीएसई का गाइडलाइन है कि हर स्कूल में साइबर क्राइम और डिजिटल सुरक्षा को लेकर क्लब का गठन होना चाहिए। इसका उद्देश्य छात्रों को इंटरनेट, सोशल मीडिया और आधुनिक तकनीकों के सुरक्षित व जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूक करना है।
इसके साथ ही पैरेंट्स–टीचर मीटिंग के दौरान उन अभिभावकों को भी विशेष रूप से जागरूक करने की आवश्यकता है, जो तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जानकारी में कमजोर है। उन्हें यह समझाना जरूरी है कि बच्चे मोबाइल, सोशल मीडिया और एआई जैसे टूल्स का किस तरह उपयोग कर रहे हैं और किन खतरों से सावधान रहना चाहिए।
इसके अलावा प्रत्येक स्कूल को अपने स्तर पर साइबर क्राइम और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर नियमित रूप से जागरूकता शिविर आयोजित करना चाहिए। ऐसे कैंपों के माध्यम से छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को साइबर अपराध, उसके कानूनी परिणामों और बचाव के उपायों की जानकारी दी जा सकती है। इससे न केवल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि तकनीक के सही और सकारात्मक उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।








