रांची : राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने आज केन्द्रीय तसर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, रांची में केन्द्रीय रेशम बोर्ड के 66 नवनियुक्त वैज्ञानिकों को प्रमाण पत्र वितरित किया।
इस मौके पर उन्होंने कहा कि सिल्क उद्योग का लोगों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण योगदान है। इस उद्योग में किसान और श्रमिकों का भी अहम योगदान है।
उन्होंने नवनियुक्त वैज्ञानिकों को कहा कि इस क्षेत्र को नवाचार, नई तकनीक और नई प्रणाली के साथ विकसित करने की आवश्यकता है ताकि विश्व के मानचित्र पर भारत सर्वाधिक सिल्क उत्पादन एवं निर्यात करने वाला देश बन सके।
इससे देश आर्थिक प्रगति के साथ-साथ किसान और श्रमिकों के आय में वृद्धि होगी। राज्यपाल ने कहा कि झारखंड में तसर सिल्क और बाजार की मांग के अनुरूप तसर से संबंधित उत्पादों में विविधता लाने की आवश्यकता है।
इस अवधारणा के साथ कार्य करने पर विश्व के अन्य देशों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। प्रतिस्पर्धा के लिए आत्मविश्वास एवं सतत प्रयास आवश्यक है।
राज्यपाल ने कहा कि सिल्क उद्योग के विकास में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची भी आवश्यकतानुसार अपनी भूमिका निभाएगा।
उद्योग के विकास हेतु आवश्यकता अनुसार उच्च संस्थानों का सहयोग भी प्राप्त करना चाहिए। इससे नई तकनीकी, नए कौशल, नए उत्पाद इत्यादि के संबंध में जानकारी प्राप्त होती है और उद्योग को बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने इस क्रम में बताया कि कॉयर बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल में उच्च संस्थानों से सहयोग, नवाचार, नए उत्पाद इत्यादि को अपनाने से इस संस्था के कार्य में कुछ ही समय में ढाई गुना की वृद्धि हो गयी।
इस प्रयास से कॉयर बोर्ड रस्सी के अलावा अन्य उत्पादों के लिए प्रसिद्ध हो गया। राज्यपाल ने सभी वैज्ञानिकों को प्रतिबद्धता से निरंतर प्रयास करने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि लगातार प्रयास से सफलता अवश्य मिलेगी। इस अवसर पर उन्होंने पुस्तक का विमोचन भी किया।
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