Rice market problems: अच्छी पैदावार! लेकिन क्यों नहीं बेच पा रहे किसान धान? जानिए क्या है कारण?

Juli Gupta
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Rice market problems:

रांची। अच्छी पैदावार के बावजूद झारखंड में इस साल धान खरीद की रफ्तार काफी धीमी बनी हुई है। राज्य सरकार ने चालू खरीफ सीजन में 60 लाख क्विंटल धान खरीद (Rice market problems) का लक्ष्य तय किया है, लेकिन एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद अब तक केवल 14.86 लाख क्विंटल धान की ही खरीद हो सकी है। यानी लक्ष्य का महज 25 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। लैम्प्स (LAMPs) के माध्यम से सरकारी दर पर धान की खरीद 15 दिसंबर से शुरू हुई थी।

राज्य खाद्य निगम के प्रबंध निदेशक ने क्या कहा?

राज्य खाद्य निगम के प्रबंध निदेशक सत्येंद्र कुमार का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार स्थिति बेहतर है और धान खरीद (Rice market problems) की प्रक्रिया 31 मार्च तक चलेगी। उन्होंने दावा किया कि धान खरीदते ही किसानों को भुगतान किया जा रहा है और अब तक 300 करोड़ रुपये किसानों के खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं।

हालांकि जमीनी स्तर पर किसानों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अनुसार, राज्य में 2.71 लाख से अधिक किसान निबंधित हैं, लेकिन अब तक केवल 25,331 किसान ही सरकारी केंद्रों पर धान बेच पाए हैं। किसानों का कहना है कि जब तक मिलर धान का उठाव नहीं करते, तब तक खरीद नहीं हो पाती। नामकुम लैम्प्स में धान बेचने आए किसान रोशन हंस बताते हैं कि कई बार धान लेकर लौटना पड़ता है।

धान खरीद में देरी का कारण क्या है?

धान खरीद में देरी की एक बड़ी वजह मिलरों की कमी है। इस साल राज्य में केवल 77 मिलर निबंधित हैं और गढ़वा, बोकारो, लातेहार व पश्चिम सिंहभूम जैसे जिलों में एक भी मिलर नहीं है। ऐसे में इन जिलों का धान दूसरे जिलों में भेजा जा रहा है, जिससे उठाव की रफ्तार और धीमी हो गई है।

लैम्प्स प्रबंधन का कहना है कि गोदाम भर जाने के कारण भी खरीद प्रभावित हो रही है। राज्य में कुल 804 धान अधिप्राप्ति केंद्र बनाए गए हैं। आंकड़ों के अनुसार, रांची और हजारीबाग जैसे जिले लक्ष्य के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन कुल मिलाकर धान अधिप्राप्ति की रफ्तार अभी भी सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है।

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