Heavy Engineering Corporation: बंद नहीं होगा एचईसी

Anjali Kumari
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Heavy Engineering Corporation:

रांची। रांची स्थित हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (HEC) को लेकर बीते दिन केंद्र सरकार स्तर पर हलचल तेज हो गयी थी। 13 नवंबर 2025 को कमेटी ऑफ ग्रुप ऑफ ऑफिसर्स (CGO) ने कंपनी को बंद करने की सिफारिश की थी। इसके बाद वित्त मंत्रालय ने भारी उद्योग मंत्रालय से एनेक्सर-2 के अनुरूप अपडेटेड बैकग्राउंड नोट जल्द उपलब्ध कराने को कहा था ।

मंत्रालय ने सुझाव दिया थी कि इस प्रक्रिया में डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक इंटरप्राइजेज (DPE) की सहायता ली जाए।बता दे एचईसी पिछले सात वर्षों से निरंतर घाटे में चल रही है। 31 मार्च 2025 तक कंपनी की कुल वित्तीय देनदारी 2067 करोड़ रुपये दर्ज की गई, जबकि कार्यशील पूंजी पूरी तरह खत्म हो चुकी है और यह माइनस 1594 करोड़ तक जा चुकी है।कंपनी की नेटवर्थ भी नेगेटिव में है।कुल देनदारियां अब लगभग 4300 करोड़ रुपये के आसपास हैं। आर्थिक संकट का असर इतना गहरा है कि कंपनी नियमित वेतन भुगतान और कच्चे माल की खरीद तक करने में असमर्थ है।

एचईसी के लिए एक अलग कमेटी का गठन हुआ है:

दिल्ली में भारतीय मजदूर संघ से जुड़े PSU कर्मचारियों के राष्ट्रीय परिसंघ की बैठक में एचईसी के मुद्दे को विशेष महत्व दिया गया। एचईसी के लिए एक अलग कमेटी का गठन हुआ, जो संबंधित मंत्रियों से मुलाकात कर समाधान खोजने का प्रयास करेगी। बीएमएस नेताओं ने रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ से दो घंटे तक विस्तृत चर्चा की। मंत्री ने जल्द ही फिर बैठक बुलाने का आश्वासन दिया।एचईसी के सीएमडी के.एस. मूर्ति ने साफ कहा है कि किसी भी परिस्थिति में मशीनें बंद नहीं होंगी। उनका कहना है कि कंपनी का एकमात्र रास्ता आत्मनिर्भरता है। उत्पादन बढ़ाकर ही नियमित वेतन भुगतान संभव होगा। उन्होंने लंबित टेंडरों को तत्काल जारी करने और ठेका मजदूरों के वेतन जल्द दिलाने का आश्वासन दिया।

रांची स्थित HEC को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ी रहत दी है:

गौरतलब है कि अगस्त 2021 में कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाले कोर ग्रुप के सचिवों ने भी एचइसी को बंद करने की अनुशंसा की थी।इसके बाद 2023 में सीईओ, नीति आयोग, DIPAM, भारी उद्योग मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के प्रतिनिधियों की समिति ने भी यही सुझाव दिया था।अब 2025 में फिर से यह सिफारिश सामने आने के बाद एचइसी का भविष्य एक बार फिर सवालों के घेरे में था लेकिन इसी बीच आज रांची स्थित Heavy Engineering Corporation (HEC) को लेकर केंद्र सरकार से बड़ी राहत वाली खबर आई है। बता दे DIPAM (Department of Investment and Public Asset Management) ने HEC को उन 18 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की सूची से हटा दिया है, जिन्हें बंद करने या विनिवेश के लिए चिन्हित किया गया था। यह फैसला 13 नवंबर को हुई लोक उद्यम विभाग की बैठक के बाद सामने आया। इससे HEC के हजारों कर्मचारियों, इंजीनियरों और प्रबंधन को बड़ी राहत मिली है।

HEC प्रबंधन के अनुसार:

HEC प्रबंधन के अनुसार कंपनी को बंद करने के बजाय इसके पुनरुद्धार पर जोर दिया जा रहा है। राज्य सरकार ने स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए HEC की 500 एकड़ जमीन खरीदने का प्रस्ताव दिया है।सीठियो, हटिया और जहर तालाब क्षेत्र में जमीन की पहचान कर ली गई है और रिपोर्ट जल्द ही बोर्ड को भेजी जाएगी। उम्मीद है कि मंजूरी मिलने पर तीन माह में जमीन बिक्री की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, जिससे HEC को 5,000 करोड़ रुपये मिलेंगे जिससे HEC अपनी 2,067 करोड़ की देनदारियां साफ करेगा और नई आधुनिक मशीनें खरीदेगा। रक्षा राज्य मंत्री व रांची सांसद संजय सेठ ने भी पुष्टि की कि “HEC किसी भी कीमत पर बंद नहीं होगा। पुनरुद्धार की दिशा में तेजी से कदम बढ़ रहे हैं।”

HEC मजदूर संघ के जनरल सेक्रेटरी रमा शंकर प्रसाद ने क्या कहा:

इस विषय को और विस्तृत से जानने के लिए IDTV इन्द्रधनुष की टीम ने रांची HEC मजदूर संघ के जनरल सेक्रेटरी रमा शंकर प्रसाद से बातचित इस दौरान उन्होंने कहा कि सर्कार पहल कर रही की मजदूरों को समय पर वेतन मिले। इतना ही नहीं उन्होंने आगे कहा कि HEC के CMD ने कहा कि वर्क ऑर्डर की कमी नहीं है और न ही मशीन बंद होगा। कंपनी को 550 करोड़ रुपये से अधिक के वर्क ऑर्डर मिले हैं।NMDC, ACL, BHEL हरिद्वार व हैदराबाद, CCL और बोकारो स्टील जैसे संस्थानों ने नए ऑर्डर दिए हैं।प्रबंधन का दावा है कि आने वाले महीनों में और भी वर्क ऑर्डर मिलने की संभावना है।अंत में रमा ने कहा कि HEC को बंद करने के बजाय इसके पुनरुद्धार पर जोर दिया जा रहा है।

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