झारखंड के बच्चों में बढ़ रहा हृदय रोग

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रांची। झारखंड में बड़ी संख्या में बड़े और बच्चे हृदय रोग से ग्रसित हो रहे हैं। खास कर बच्चों की बात करें, तो किसी के दिल में छेद है तो किसी को कोई और समस्या। दो दिन पहले रिम्स में लगे हृदय रोग जांच शिविर में चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है।

यहां राज्यभर के कुल 486 लोगों के हृदय की जांच की गई। इसमें पाया गया कि 134 मरीजों को सर्जरी की जरूरत है। इनमें से 52 बच्चे हैं, जो 12 साल तक के हैं। इन बच्चों में से 40 ऐसे हैं, जिनके दिल में छेद है। डॉक्टरों के अनुसार अनुवांशिक कारणों से भी ये बीमारियां बढ़ी हैं।

प्रेग्नेंसी के दौरान किसी दवा का असर भी कारण हो सकता है। प्रेग्नेंसी में शराब या नशीले पदार्थ का सेवन या फिर प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में मां को वायरल इंफेक्शन हुआ तो बच्चे पर इसका सीधा असर पड़ता है।

हृदय की संरचना के विकास में शुरुआत में ही दिक्कत आने की वजह से कंजेनाइटल हार्ट डिजीज की समस्या पैदा होती है।

खूंटी के परेश नाग के 8 साल के बेटे रोहित नाग के दिल में जन्म से ही 3 छेद हैं। पिता परेश ने बताया कि डॉक्टरों ने दिल में छेद होने की जानकारी दी थी। गरीबी के कारण इलाज नहीं करा सके। 6 साल की सुनैना के पिता चरण मुंडा ने बताया कि जन्म के दौरान बेटी ठीक थी।

पर, एक साल के बाद अचानक पेट फूलने की समस्या हो गई। धड़कन भी बढ़ने लगी। जांच कराने पर पता चला दिल में एक छेद है। छोटे बच्चों की भी ओपन हार्ट सर्जरी संभव है। डॉक्टर बताते हैं कि जन्म के 10-15 दिन बाद के नवजातों की भी सर्जरी की जा सकती है। समय पर ऑपरेशन नहीं कराने के कारण बड़े होने पर परेशानी बढ़ जाती है।

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