Farmers freed from middlemen:
रांची। झारखंड में धान कटाई का मौसम शुरू हो गया है। खाद्य आपूर्ति विभाग भी धान खरीद योजना को अंतिम रूप देने में जुटा है। इसके लिए संचालन की प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर ली गई है। इसे मंजूरी के लिए राज्य योजना प्राधिकृत समिति को भेजी जाएगी।
इस बार राज्य में छह लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा गया है। खरीदारी की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। टू वे कम्युनिकेशन प्रणाली लागू की जा रही है। इसके तहत जहां निबंधित किसानों को एसएमएस या फोन से संबंधित लैम्पस-पैक्स में धान बेचने की सूचना दी जाएगी। वहीं किसान अपनी सुविधा के अनुसार खुद स्लॉट बुक कर सकेंगे। इसके लिए उपार्जन पीएमयू द्वारा एक मोबाइल एप विकसित किया जाएगा। इस पर किसान स्लॉट बुक कर अपनी सहूलियत के हिसाब से धान बेच सकेंगे।
स्लॉट बुकिंग के लिए कॉल सेंटरः
स्लॉट बुकिंग के लिए कॉल सेंटर की व्यवस्था भी होगी, ताकि जिन किसानों के पास स्मार्ट फोन नहीं है, वे कॉल करके स्लॉट बुक करा सकेंगे। इस बार एक किसान से अधिकतम 200 क्विंटल धान खरीदी जाएगी। लेकिन अगर कोई किसान इससे ज्यादा धान बेचना चाहते हैं, तो संबंधित जिले के डीसी से इसकी अनुमति लेनी होगी।
पिछले सीजन में 2.37 लाख का हुआ था निबंधनः
राज्य में पिछले सीजन में करीब 2.37 लाख किसानों ने धान बिक्री के लिए निबंधन कराया था। इसमें से 58,827 किसानों ने झारखंड राज्य खाद्य निगम को धान की बिक्री की थी। खरीफ विपणन मौसम 2024-25 में 40 लाख क्लिंटल धान की खरीदारी हो पाई थी। विभाग को उम्मीद है कि धान की खरीदारी में इस साल निर्धारित लक्ष्य पूरा हो जाएगा। क्योंकि, इस बार मानसून मेहरबान रहा, जिससे पैदावार अच्छी हुई है।
जमीन का सीओ करेंगे वेरिफिकेशनः
अंचल अधिकारी (सीओ) किसानों के रजिस्ट्रेशन के आवेदन में दर्ज भूमि की जांच और धान खरीद के दौरान जमीन का रेंडम वेरिफिकेशन करेंगे। प्रखंड विकास पदाधिकारी भी निबंधित किसानों के वास्तविक किसान होने संबंधी जांच करेंगे। धान बेचने वाले किसान कृषि कार्य में संलग्न हैं या नहीं और घोषित भूमि पर धान की खेती हुई या नहीं, इसका भी रेंडम वेरिफिकेशन किया जाएगा।
खरीद के समय किसान का होगा ई-केवाईसीः
धान खरीद के लिए झारखंड राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम लिमिटेड रांची को नोडल एजेंसी बनाया गया है। पहले से रजिस्टर्ड सभी किसानों का धान खरीद के समय ई-केवाईसी किया जाएगा। फिर उपार्जन पोर्टल पर निबंधित किसानों की एक सूची तैयार की जाएगी, जो बैंक खाता, मोबाइल नंबर और जमीन के खाते के आधार पर होगी। यह सूची दो तरह से तैयार होगी। पहला-वे किसान जो हर साल नियमित रूप से धान बेचते हैं। दूसरा-जो पिछले कुछ सालों से धान नहीं बेच रहे थे।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी करा सकेंगेः
धान खरीद का काम कंप्यूटरीकृत प्रणाली (ई-उपार्जन पोर्टल) के तहत होगा। जिला आपूर्ति पदाधिकारी नियमित रूप से किसानों का रजिस्ट्रेशन करेंगे। किसान इस बार ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी करा सकेंगे। इसके लिए किसानों को आवेदन के साथ फोटोयुक्त पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, बैंक खाता विवरणी, भूमि का रकबा (खाता व प्लॉट संख्या) की कॉपी अपलोड करनी होगी। वैध मोबाइल नंबर भी देना होगा। मोबाइल नंबर और बैंक खाते में सुधार भी किसान खुद उपार्जन पोर्टल से कर सकेंगे। इसी तरह ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए भी यही दस्तावेज देने होंगे। जिला आपूर्ति कार्यालय इसे ई-उपार्जन पोर्टल पर अपलोड करेगा।
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