Electricity: पैसे की कमी से अंडरग्राउंड केबलिंग का काम अधार में लटका? मुसीबत में लोग? [Underground cabling work stuck due to lack of funds? People in trouble?]

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झारखंड में त्योहार हो और बिजली न कटे ऐसा हो नहीं सकता। बिजली का गुल होना त्योहार तक ही सिमित नही रहती ,आंधी आए या जोर की बारिश चारो ओर अंधेरा होना तो बनता है। इतना ही नहीं किसी इलाके का ट्रांसफार्मर खराब हो जाए तो इससे जुड़े आस पास के इलाकों में मरम्मत के नाम पर 10 से 15 दिनों के लिए 8 से 10 घंटा तक बिजली बाधित रहती हैं। जरा सोचिए उन इलाकों में रहने वाले लोगो का क्या हाल होता होगा ? अब एक सवाल उठ कर सामने आ रहा हैं कि जब भी कोई त्योहार आता है तो बिजली क्यों ठप हो जाती है?

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इसका एक मात्र कारण हैं सरहुल की झांकी हो या रामनवमी की झांकी और झंडे इतने लंबे और ऊंचे होते है कि जब तब बिजली के खंबे से टकरा सकते हैं, जीससे लोगो को बिजली का तेज झटका लग सकता है और बड़ी दुर्घटना घट सकती हैं। । त्योहार में बिजली की बंदोबस्त को लेकर जब भी लोगो ने बिजली विभाग पर सवाल उठाया, हमेशा एक जवाब सुनने को मिलता है कि अंडरग्राउंड केबलिंग काम चल रहा हैं, जल्द पूरा हो जाएगा। हाल ही में झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) ने दावा किया है कि अंडरग्राउंड केबलिंग का काम 2023 के मार्च में ही पूरा हो चूका है।

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अब तेज आंधी हो या बारिश या फिर कोई जुलूस- शोभायात्रा निकलने वाला पर्व हो, बिजली नहीं कटेगी, लेकिन काम पुरे होने बाद भी शहर का वही पुराना हाल हैं क्यों? फिर खम्बों पर बिजली के तार क्यों नजर आ रहे है ? और क्या अब से त्यहारों में बिजली नहीं कटेगी ?

बात कहीं दस्तावेज में ही न रह जाए इसलिए इन सभी सवालों के जवाब हमने रांची बिजली विभाग के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (superintending engineer) बीएन साहू (BN Sahu) से मांगे। उन्होंने कहा, काम पूरा नहीं हुआ, सिर्फ 40% अंडरग्राउंड केबलिंग का काम हुआ है। जितना पहले काम हुआ सो हुआ अभी नहीं हो रहा हैं। उन्होंने आगे कहा, कि पुरे शहर को अंडरग्राउंड केबलिंग करने के लिए लगभग 4000 हजार करोड़ रुपये लगेंगे जिसके लिए फंड चाहिए। फिलहाल कोई योजना भी नहीं चल रहा है कि काम पुरा हो सके। एक सवाल और है कि आखिर यह अंडरग्राउंड केबलिंग का काम कब शुरू हुआ ? कितना दूर काम हुआ है ? और कितना खर्च हुआ ?

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बता दे अंडरग्राउंड केबलिंग का काम 2005 में शुरू हुआ और झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के हिसाब से रांची सर्किल में 548 करोड़ रुपये खर्च हो चुके है। इतना ही नहीं उनका दावा है कि रांची में 248 किमी. 33. केवी लाइन और 64 किमी लाइन. 11 किवी लाइन को अंडरग्राउंड केबलिंग करने का काम पूरा हो चूका है।

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