नीतीश-तेजस्वी संग हेमंत की यारी से सहज नहीं है कांग्रेस

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दयानंद राय

रांची : देशभर में विपक्षी एकता के सूत्रधार बने नीतीश कुमार की झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से यारी से प्रदेश कांग्रेस सहज नहीं है। बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बिहार के सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने मुलाकात की। हालांकि इस कार्यक्रम से कांग्रेस के नेताओं ने दूरी बनाकर रखी। इससे अंदेशा लग रहा है कि नीतीश और हेमंत सोरेन की यारी से कांग्रेस सहज नहीं है। कांग्रेस इसे लेकर सहज नहीं है तो इसके एक नहीं कई कारण है। पहला कारण ये है कि वर्तमान में झारखंड में जदयू का अस्तित्व नगण्य है। राज्य में इसका एक भी विधायक नहीं है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष खीरू महतो भी बिहार से राज्यसभा के लिए चुने गये हैं।

अगर 2024 में होनेवाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में जदयू महागठबंधन में शामिल होती है तो सीटों के बंटवारे में उसकी सहज हिस्सेदारी बनेगी। इससे कांग्रेस को नुकसान हो सकता है क्योंकि अगर जदयू को सीटें मिलती हैं तो कांग्रेस का कोटा कम होगा। दूसरा, कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार मान कर काम करता है, पर जिस तरह से नीतीश कुमार विपक्षी एकता की साझा मुहिम के नायक की तरह विपक्षी नेताओं से मिलकर उन्हें एकजुट कर रहे हैं ऐसे में वे राहुल गांधी के बराबर और कई मायनों में राहुल गांधी से ज्यादा मजबूत प्रधानमंत्री पद के दावेदार की तरह अपनी छवि गढ़ रहे हैं।

ऐसे में प्रधानमंत्री के पद को लेकर दावेदारी का सवाल आगे चलकर कांग्रेस के लिए गले की ह्ड्डी बन सकता है। हालांकि नीतीश कुमार कहते रहे हैं कि वे प्रधानमंत्री पद के दावेदार नहीं हैं लेकिन उनके नेतृत्व में विपक्ष एकजुट हुआ और 2024 के चुनावों में केंद्र में विपक्षी गठबंधन की सरकार बनी तो नीतीश कुमार प्रधानमंत्री पद के सहज और स्वभाविक दाचेदार होंगे। इसलिए कांग्रेस नीतीश और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बढ़ती यारी से सहज नहीं है।

नीतीश के आगे हेमंत हैं नतमस्तक

बुधवार को तेजस्वी के साथ सीएम नीतीश की हेमंत से मुलाकात ने यह साफ कर दिया है कि नीतीश कुमार के आगे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन नतमस्तक हैं। तभी उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार हमारे गार्जियन हैं और हम नयी पीढ़ी के राजनीतिक सिपाही हैं। हमें इनसे बहुत कुछ सीखना है, राज्य की क्षेत्रीय अस्मिता और देश की एकता कैसे बचे इस मुद्दे पर इनका मार्गदर्शन हम लेते रहेंगे। वहीं नीतीश कुमार ने भी दिशोम गुरू शिबू सोरेन के सम्मान में कहा कि पहली बार शिबू सोरेन ने ही मुझे मुख्यमंत्री बनवाया था। जाहिर है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन नीतीश कुमार के साथ पॉलिटिकली कंफर्टेबल पोजिशन में हैं और आगे भी अपनी यारी को बरकरार रखेंगे। लेकिन उनकी यारी से प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक कांग्रेस के हित प्रभावित होंगे।

आगे क्या होगा

ऐसी चर्चाएं हैं कि जल्द ही पटना में नीतीश कुमार के नेतृत्व में विपक्षी दलों की एक साझा बैठक आयोजित की जायेगी। इसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और अन्य नेता भी हिस्सा लेंगे। अगर नीतीश विपक्षी नेताओं को एकजुट करने की अपनी मुहिम में सफल होते हैं और वे दिख भी रहे हैं तो हेमंत सोरेन के साथ से जहां झारखंड में जदयू फिर से मजबूत होने की कोशिश करेगी वहीं भाजपा विरोध की नीतीश की लड़ाई का मोर्चा हेमंत सोरेन का साथ मिलने से और मजबूत होता जायेगा।

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