रांची। विधानसभा चुनाव से पहले झारखंड में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के कुछ विधायकों के बीजेपी के संपर्क में होने की चर्चा ने सियासत गरमा दी है।
पिछले 24 घंटे से झामुमो विधायकों के बीजेपी के संपर्क में होने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में तैर रही है। सबसे बड़ी बात है कि इस चर्चा के केंद्र बिंदु में पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ झामुमो नेता चंपाई सोरेन हैं।
दरअसल, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और मंत्री चंपाई सोरेन के बीच मतभेद की खबरें आ रही हैं। इसके आधार पर ही चंपाई सोरेन के बीजेपी के संपर्क की संभावनाओं को बल मिला है।
कहा जा रहा है कि झामुमो के असंतुष्ट विधायकों का भी उन्हें समर्थन है। इससे जहां एक ओर झामुमो को नुकसान हो सकता है, वहीं बीजेपी को कोल्हान समेत कई अन्य आदिवासी सीटों पर मजबूती मिल सकती है।
हालांकि अब तक इन सारी बातों को चर्चा ही माना जा सकता है। परंतु यह भी उतना ही सच है कि राजनीति में कोई भी चर्चा यूं ही नहीं होती।
जिस प्रकार बिना चिंगारी के घुआं नहीं उठता, उसी प्रकार राजनीति में कोई भी चर्चा यूं ही नहीं होती। आइए जानते हैं कि झारखंड में सियासी उठापटक की चर्चा क्यों हैं।
झारखंड में विधानसभा चुनाव के पहले बड़े सियासी खेल की चर्चा शुरू हो गई है। जेल से बाहर आने के बाद हेमंत सोरेन वर्तमान कार्यकाल में दूसरी बार मुख्यमंत्री बन चुके हैं, लेकिन जिस तरह से चंपाई सोरेन को सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी, उसे लेकर उनकी नाराजगी की चर्चा काफी दिनों से चल रही है।
चंपाई सोरेन का पूरे कोल्हान क्षेत्र में झामुमो का बड़ा प्रभावी नेता माना जाता है। अब राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि चंपाई सोरेन के साथ कोल्हान क्षेत्र के कई विधायक भी उनके साथ हैं।
खास कर जिनके अंदर नाराजगी है। फिलहाल चंपाई सोरेन अपने विधानसभा क्षेत्र सरायकेला में हैं और उनके रांची पहुंचने की संभावना है।
चंपाई सोरेन को लेकर जो दावा किया जा रहा है, उसके अनुसार यदि बात बन जाती हैं, तो वे जल्द ही नई दिल्ली जाकर बीजेपी के वरिष्ठ नेता अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात कर सकते हैं। लेकिन फिलहाल इसकी पुष्टि किसी भी स्तर से नहीं हो पा रही है।
खुद चंपाई सोरेन ने मामले को लेकर स्पष्ट कुछ नहीं कहा है। उनका सिर्फ इतना कहना है कि अभी इंतजार कीजिए। इसका मतलब है कि वह भी मामले को सिरे से खारिज नहीं कर रहे हैं।
उधर झामुमो से हटाये गये पूर्व विधायक लोबिन हेंब्रम का नाम भी इससे जुड़ रहा है। उनका भी यही कहना है कि अभी इंतजार कीजिए, सबकुछ जल्द स्पष्ट हो जायेगा।
हिमंता बिस्वा सरमा ने चर्चाओं को दी हवा
असम के मुख्यमंत्री और झारखंड बीजेपी के सह चुनाव प्रभारी हिमंता बिस्वा सरमा ने चंपाई सोरेन की तारीफ करके सियासत को और हवा दे दी है।
बीजेपी के एक कार्यक्रम में शामिल होने रांची पहुंचे हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि 2019 के बाद से जब से हेमंत सोरेन के नेतृत्व में गठबंधन सरकार बनी, लोगों की जनआकांक्षा पूरी नहीं हुई, राज्य सरकार ने कोई भी वायदा पूरा नहीं किया।
सिर्फ चंपाई सोरेन के करीब छह महीने के कार्यकाल में ही थोड़ा बहुत काम हुआ। झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां योजना भी चंपाई सोरेन सरकार की देन है। इससे पहले भी हिमंता बिस्वा सरमा कई मौकों पर चंपाई सोरेन सरकार की तारीफ कर चुके हैं।
कटे-कटे से रह रहे हैं चंपाई
सीएम हेमंत सोरेन से मंत्री चंपाई सोरेन की नाराजगी की चर्चा सत्ता परिवर्तन के साथ ही शुरू हो गई थी।
लेकिन नाराजगी की खबर तब जोर पकड़ी, जब 10 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के जन्मदिन पर मंत्री चंपाई सोरेन ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से बधाई नहीं दी, जबकि चंपाई सोरेन की ओर से हर छोटे-बड़े नेताओं और महापुरुषों की जयंती पर बधाई दी जाती हैं, वहीं उनकी ओर से कई छोटे-छोटे विषयों को लेकर भी ट्वीट किया जाता हैं। इधर एक महीने से चंपाई सोरेन हमेशा कटे-कटे से रह रहे हैं।
चंपाई सोरेन का खासमखास कर रहा डील
राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा है कि पूर्व सीएम और मंत्री चंपाई सोरेन का सबसे खास व्यक्ति पिछले कई दिनों से दिल्ली में है और इस डील को अंतिम रूप देने में जुटा है।
बताया जा रहा है कि बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से कई राउंड की बात भी हो चुकी हैं और वो चंपाई सोरेन का तार बीजेपी से जोड़ रहा है।
चंपाई को कई झामुमो विधायकों का साथ
चंपाई सोरेन की कथित नाराजगी के साथ ही सियासत में इस बात का भी बहुत जोर से शोर मचा है कि चंपाई सोरेन को जेएमएम के कई नाराज विधायकों का साथ मिल सकता है।
चंपाई सोरेन को पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां के कई विधायकों का साथ मिल सकता है।
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में कोल्हान क्षेत्र के 14 में से 11 सीटों पर जेएमएम को जीत मिली थी, वहीं यदि अब जेएमएम में टूट होती है, तो कोल्हान क्षेत्र में पार्टी को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता हैं।
लोबिन हेम्ब्रम और चमरा लिंडा भी चंपाई के संपर्क मे
सीएम हेमंत सोरेन से जेएमएम के निष्कासित विधायक लोबिन हेम्ब्रम काफी दिनों से नाराज चल रहे हैं।
लोबिन हेम्ब्रम ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में बगावत कर राजमहल सीट से जेएमएम प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ा था।
इसके बाद जेएमएम की शिकायत पर स्पीकर के न्यायाधिकरण ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी। वहीं जेएमएम विधायक चमरा लिंडा ने भी पार्टी के खिलाफ जाकर लोहरदगा संसदीय सीट से चुनाव लड़ा।
अभी जेएमएम की ओर से उन्हें निलंबित किया गया है। कहा जा रहा है कि दोनों नाराज विधायक भी चंपाई सोरेन के संपर्क में हैं।
पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख की नाराजगी की भी खबर
हेमंत सोरेन के नेतृत्व में जब राज्य में जेएमएम गठबंधन की मौजूदा सरकार बनी, तो मंत्री बादल पत्रलेख की जगह दीपिका पांडेय को मंत्री बनाया गया। जिससे उनकी नाराजगी की चर्चा है।
दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी के कई अन्य विधायक फेरबदल के बावजूद मंत्री बनने से वंचित रह गए, जिसके कारण पार्टी के कई अन्य विधायकों की कथित नाराजगी की भी बात भी सामने आ रही है।
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