Hemant Soren:
रांची। झारखंड की राजनीति में बड़े उथल-पुथल के संकेत मिल रहे है। देश की राजधानी दिल्ली और रांची से आ रही अंदरूनी खबरें बताती हैं कि हेमंत सोरेन भाजपा के साथ नहीं, बल्कि अपने दम पर JMM की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाने की तैयारी में हैं।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस में बड़ी टूट की आहट है—7 से 8 विधायक झारखंड मुक्ति मोर्चा में शामिल होने के लिए तैयार बताए जा रहे हैं। वहीं RJD में भी दरार की संभावना जताई जा रही है और 2–3 विधायक जेएमएम के संपर्क में बताए जा रहे हैं।
ऐसे हालात में पहली बार ऐसा हो सकता है जब कांग्रेस और बीजेपी दोनों विपक्ष में बैठेंगे और हेमंत सोरेन स्वतंत्र रूप से अपनी सरकार चलाएंगे।
दिल्ली में बैठी सियासी रणनीति टीम की भूमिका, JMM का आगे का प्लान, बीजेपी की रणनीतिक चुप्पी और 14 जनवरी से पहले होने वाले संभावित बड़े बदलाव को लेकर खूब चर्चा हो रही है।
कहते हैं राजनीति से जुड़ी उड़नेवाली खबरें झूठी नहीं होती, बस समय से पहले आ जाती हैं। संभवतः झारखंड में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। राज्य की 25वीं वर्षगांठ समारोह के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दिल्ली चले गये। किसी ने कहा निजी यात्रा पर गये हैं। किसी ने कहा हेल्थ चेकअप के लिए गये हैं। इस बीच चर्चा शुरू हो गई कि दिल्ली में कुछ और ही खिचड़ी पक रही है।
दावे किये जाने लगे कि राज्य में एक बार फिर बीजेपी-झामुमो की सरकार बननेवाली है और हेमंत सोरेन भी अब कांग्रेस मुक्त भारत अभियान का हिस्सा बन सकते हैं। मतलब जितने लोग उतनी बातें। तमाम राजनीतिक जानकारों के पंडित कयास लागने में जुटे हैं कि आखिर दिल्ली में चल क्या रहा है।
इस बीच मंगलवार की सुबह बड़ी खबर आई कि झारखंड के चर्चित सीए नरेश केजरीवाल के रांची से लेकर मुंबई और सूरत के ठिकानों का पर एक साथ ईडी की रेड पड़ी है। इस खबर उन तमाम दावों की हवा निकाल दी, जो कह रहे थे कि बीजेपी और झामुमो की सरकार बन रही है। क्योंकि, सीए नरेश केजरीवाल झामुमो के कुछ करीबियों के करीब माने जाते हैं। पिछली बार भी नरेश केजरीवाल के ठिकानों पर छापे पड़े थे, तब दावे किये गये थे कि झामुमो सरकार के एक कद्दावर के पैसे को यही सीए संभाल रहे थे। ऐसे में अब राजनीतिक विश्लेषकों के दावे भी अब बदल गये हैं कि बीजेपी और झामुमो एक प्लेटफार्म पर आनेवाले हैं।
अब आगे बढ़ने से पहले ये भी जानना जरूरी है कि राजनीतिक फिजा में तैर रही चर्चाओं के मुताबिक हेमंत सोरेन को बीजेपी की ओर से ऑफऱ क्या किया गया था। ..तो राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक हेमत सोरेन को ऑफऱ दिया गया था कि आप केंद्र में कोयला मंत्री का पद संभाले और झारखंड की कमान अपनी पत्नी को संभालने दें।
केंद्रीय मंत्री बनने के बाद बीजेपी हेमंत सोरेन की छवि राष्ट्र स्तर पर एक बड़े आदिवासी नेता के रूप में संवारेदी। साथ ही, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में झारखंड से सटी सभी 10-12 सीटें बीजेपी झामुमो को देगी और ये सीटें जिताने में मदद भी करेगी। इसके अलावा हेमंत सोरेन को ये भी समझाने की कोशिश की गई थी कि यदि वे बीजेपी के साथ आते हैं, तो राज्य की आर्थिक समस्याएं भी दूर होंगी, क्योंकि तब डबल इंजन की सरकार चलेगी। साथ ही ये भी समझाया गया कि 2029 तक परीसिमन होना है, तब राज्य में आदिवासी सीटें घटेंगी, तो वे आजवाली पोजिशन में नहीं रहेंगे। इन सारी चर्चाओं के बीच अब नरेश केजरीवाल के ठिकानों पर पड़े छापों के बाद राजनीतिक रणनीतिकारों के समीकरण ही बदले गये हैं।
इस बीच एक और नई चर्चा ने जोर पकड़ लिया है कि अब हेमंत सोरेन अपने बलबूते पर सरकार बनायेंगे। और यह सब 14 जनवरी तक हो जायेगा। तब 14 जनवरी के बाद राज्य में नई सरकार होगी, जिसके मुख्यमंत्री तो हेमंत सोरेन ही होंगे, पर सारे विधायक उनके अपे होंगे। पर यह होगा कैसे। चर्चा है कि राजद और कांग्रेस के कई विधायक हेमंत सोरेन के संपर्क में हैं, जो झामुमो में आने को तैयार हैं। दरअसल, इस चर्चा ने तब ही जोर पकड़ लिया था, जब बिहार विधानसभा चुनाव का परिणाम आया, जिसमें राजद और कांग्रेस को करारी हार मिली। इससे हेमंत सोरेन को मौका मिला।
वैसे भी बिहार में टिकट बंटवारे के दौरान मिले धोखे के बाद हेमंत सोरेन राजद और कांग्रेस के रवैये से नाराज थे। चर्चाओं के मुताबिक अब हेमंत सोरेन चाहते हैं वह पूर्ण बहुमत की सरकार बनायें। इसके लिए उन्हें 10 से भी कम विधायकों की जरूरत है। यदि राजद के 4 में से 3 विधायक उन्हें मिल जायें बात आगे बढ़ सकती है। कांग्रेस के दो तिहाई विधायकों को साथ लाना थोड़ा मुश्किल दिखता है, लेकिन असंभव तो कुछ भी नहीं है। बहरहाल अब देखना होगा कि इस दूसरी चर्चा में कितना दम है, या इसकी भी वैसी ही हवा निकलेगी, जैसा कि पहली चर्चा के साथ होता दिख रहा है। हां पर इतना जरूर है कि झारखंड के सियासी गलियारे में कुछ न किछ खिचड़ी तो जरूर पक रही है और वो क्या है, यह तो आनेवाला समय ही बतायेगा।
नोटः लेखक आइडीटीवी इंद्रधनुष के संपादक हैं…



