1932 के नाम पर वोट लेकर युवाओं को धोखा दिया: अमित मंडल
रांची,एजेंसियां। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सह विधायक अमित मंडल ने आज राज्य सरकार पर बड़ा हमला बोला।
उन्होंने झारखंड सरकार द्वारा हाल ही में नगर विकास एवम आवास विभाग में हुई कनीय अभियंताओं की नियुक्ति पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि झामुमो कांग्रेस राजद की सरकार ने विगत विधानसभा चुनाव में खतियान आधारित स्थानीय नीति बनाकर राज्य के बेरोजगार युवाओं को तृतीय और चतुर्थ श्रेणी में नौकरी देने का वादा किया था।
बाद में विधानसभा में भी तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घोषणा की थी कि किसी बाहरी व्यक्ति को झारखंड में नौकरी नही लेने देंगे।
हेमंत सरकार ने 1932 के खतियान आधारित स्थानीय नीति का प्रस्ताव जब विधानसभा में लाया तो भाजपा ने उसे समर्थन करते हुए पारित कराया, लेकिन सरकार की मंशा साफ नही थी।
तत्कालीन हेमंत सरकार ने उसे राजभवन और राष्ट्रपति के पास भेजने के नाम पर केवल राजनीति की। अमित मंडल रविवार को प्रदेश कायार्लय में पत्रकारों से बात कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि इसके पूर्व रघुवर सरकार ने 1985 का कट ऑफ मानकर स्थानीय नीति बनाई थी, जिसके आधार पर एक लाख से ज्यादा युवाओं की नियुक्ति हुई थी, जिसमें 85%बेरोजगार झारखंड राज्य के निवासी थे।
उन्होंने कहा कि झामुमो कांग्रेस सरकार ने एक तो नियुक्ति नहीं की और यदि सब मिलाकर तीन चार हजार नियुक्ति हुई भी तो उसमे अनारक्षित सीटों पर 70%से ज्यादा लोगो को नियुक्ति मिली है।
वर्तमान सरकार हर जगह ढिंढोरा पीट रही है कि हमने 50000 नौकरी दे दी, लेकिन हकीकत ये है कि राज्य सरकार अब तक जेपीएससी और जेएसएससी के तहत तीन चार हजार से ज्यादा नौकरी नही दे पाई है।
कहां प्रतिवर्ष पांच लाख नियुक्ति का वादा और सच्चाई साढ़े चार वर्षों में मात्र चार हजार नियुक्ति। उसमे भी अनारक्षित सीटों पर अधिकांश बाहरी लोगों की नियुक्ति हुई।
मंडल ने कहा कि सरकार का यह दावा पूरी तरह फेल हुआ जिसमें कहा था कि 60/40 के तहत हम बाहरियों को सरकारी नौकरी में रोक देंगे।
कहा कि भाजपा ने 60/40 की नीति का भी विरोध किया था, लेकिन राज्य की झामुमो सरकार ने 60/40 को लागू कर ओपन टू ऑल की स्थिति उत्पन्न कर दी।
राज्य सरकार ने गलत एजेंसी को बहाल कर के सारी सीटों को बेंच रही है। इसके कारण बाहरी लोगों का प्रवेश झारखंड की नौकरियों में हो रहा है।
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