बीजेपी कार्यकर्ताओं की सलाह पर ही तय होगा सांसदों का टिकट
रांची। आगामी लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने कमर कस ली है। इस बार बीजेपी में सांसदों के टिकट बंटवारे में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। खास बात यह है कि इस बार बीजेपी कार्यकर्ताओं की सलाह पर ही सांसदों के टिकट तय होंगे।
इसके लिए पार्टी फरवरी में विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन दिल्ली में करने जा रही है। भाजपा राष्ट्रीय परिषद की बैठक फरवरी में दिल्ली में होगी। इसमें सात हजार कार्यकर्ता शामिल होंगे। झारखंड से भी 250 नेता कार्यकर्ता बैठक में भाग लेंगे।
आगामी लोकसभा चुनाव के लिए इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कई अन्य मुद्दों के साथ चुनाव के लिए पार्टी प्रत्याशियों पर भी चर्चा होगी। इस दौरान फीडबैक के आधार पर ही प्रत्याशियों का चयन किया जाएगा।
लोकसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले होने वाली इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। बैठक में कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक पर ही झारखंड में लोकसभा की 14 सीटों के लिए प्रत्याशियों का चयन किया जायेगा।
चर्चा है कि इस बार पार्टी आठ सीटों पर नये प्रत्याशी देने जा रही है। बैठक में आठ सीटों के लिए नए प्रत्याशियों का चयन किया जाएगा। जिन सांसदों का टिकट कटनेवाला है, उनमें धनबाद के सांसद पीएन सिंह और पलामू के सांसद बीडी राम का नाम शामिल है।
इनकी उम्र 70 साल से अधिक हो चुकी है। कहा जा रहा है कि गोड्डा, खूंटी, हजारीबाग, दुमका सीट पर कोई बदलाव नहीं होगा। लोहरदगा के लिए कई नए और दमदार नेता टिकट की दावेदारी कर रहे हैं।
भाजपा लोकसभा में टिकट देने के लिए कार्यकर्ताओं को फीडबैक के अलावा स्वतंत्र एजेंसी की भी सलाह ले रही है। चतरा से मौजूदा सांसद सुनील सिंह को 2019 में भी टिकट लेने के लिए स्थानीय स्तर पर विरोध का सामना करना पड़ा था। इस बार फिर से उनकी राह मुश्किल लग रही है।
जमशेदपुर से सांसद विद्युत वरण महतो की जगह उनके बेटे भी भाजपा से टिकट के दावेदार हैं। वहां पार्टी किसी अन्य पर भी दांव लगा सकती है। रांची के सांसद संजय सेठ क्षेत्र में हमेशा ही सक्रिय रहते हैं। उनकी लोकप्रियता भी है। परंतु राजनीतिक माहौल में स्थानीयता के मुद्दे के हावी होने से उनके टिकट में भी परेशानी हो सकती है।
पार्टी रांची के किसी हाई प्रोफाइल चेहरे को मैदान में उतार सकती है। पलामू में भाजपा को राजद की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। इस सुरक्षित सीट पर पार्टी किसी अन्य दलित चेहरे को सामने ला सकती है। बीडी राम दो बार सांसद रह चुके हैं और उनकी उम्र भी 70 साल पार कर चुकी है।
लोहरदगा सीट पर सांसद सुदर्शन भगत की छवि तो स्वच्छ है, लेकिन एक खेमा उनका विरोध कर रहा है। उनका टिकट बदला तो भाजपा की राष्ट्रीय सचिव आशा लकड़ा या पूर्व आइपीएस अरुण उरांव वहां से दावेदार हो सकते हैं।
चाईबासा में जेबी तुबिद पिछली बार जीत नहीं पाए थे। इस बार यहां कोई चेहरा देखने को मिलेगा, यह पक्का है। इस बार बीजेपी कुछ विधायकों पर भी दांव लगा सकती है। बोकारो से भाजपा विधायक बिरंची नारायण या धनबाद से विधायक राज सिन्हा पार्टी दांव लगा सकती है।
हटिया से भाजपा विधायक नवीन जायसवाल भी चुनाव लड़ना चाह रहे हैं। वह रांची सीट से उम्मीद लगाये बैठे हैं। रांची में पिछले तीन चुनावों से लोकसभा टिकट की दावेदारी करते रहे प्रदीप वर्मा इस बार भी होर्डिंग पोस्टर लगा कर जनता को बधाई शुभकामना दे रहे हैं। चतरा लोकसभा क्षेत्र से एनसीपी के विधायक कमलेश सिंह टिकट की उम्मीद लगाये बैठे हैं।
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