Baba Baidyanath Dham: बाबा बैद्यनाथ धाम में बसंत पंचमी पर VVIP दर्शन बंद, आम भक्तों को मिलेगी प्राथमिकता

Anjali Kumari
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Baba Baidyanath Dham

देवघर। देवघर स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में बसंत पंचमी के पावन अवसर पर जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अहम फैसला लिया है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि इस दिन VIP, VVIP और आउट ऑफ टर्न दर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। निर्णय का मकसद यह है कि आम श्रद्धालु बिना किसी भेदभाव के सुगमता से जलाभिषेक और दर्शन कर सकें।

23 जनवरी को सुबह खुलेगा मंदिर का पट

प्रशासन के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन यानी 23 जनवरी को बाबा बैद्यनाथ मंदिर का पट प्रातः 3:05 बजे खोला जाएगा। इसके बाद निर्धारित पूजा-अर्चना और जलाभिषेक की प्रक्रिया शुरू होगी। हर साल इस पर्व पर लाखों श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं, ऐसे में विशेष दर्शन की छूट से अव्यवस्था की आशंका को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

VVIP दर्शन पर रोक

देवघर के उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने बताया कि यह फैसला पूरी तरह जनहित में है। उन्होंने कहा कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को घंटों कतार में लगना पड़ता है और वीआईपी व्यवस्था के कारण उन्हें अतिरिक्त परेशानी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए बसंत पंचमी के दिन किसी भी स्तर पर आउट ऑफ टर्न दर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

शीघ्र दर्शनम सुविधा रहेगी जारी

हालांकि, प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि 600 रुपये शुल्क वाली ‘शीघ्र दर्शनम’ सुविधा पूर्ववत जारी रहेगी। इस व्यवस्था के तहत तय नियमों का पालन करते हुए श्रद्धालु अपेक्षाकृत कम समय में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन कर सकेंगे। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि यह सुविधा पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित होगी।

श्रद्धालुओं से अपील

उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे प्रशासन द्वारा तय की गई व्यवस्थाओं का पालन करें। उन्होंने बताया कि सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और प्रशासनिक कर्मियों की तैनाती की जाएगी, ताकि दर्शन प्रक्रिया सुरक्षित और व्यवस्थित बनी रहे।

आस्था और व्यवस्था के बीच संतुलन

देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल बाबा बैद्यनाथ धाम में पर्व-त्योहारों पर भारी भीड़ उमड़ती है। बसंत पंचमी पर लिया गया यह निर्णय धार्मिक आस्था के सम्मान के साथ-साथ प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि दर्शन व्यवस्था निष्पक्ष, सुरक्षित और श्रद्धालु-केंद्रित बनी रहे।

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