रांची। रांची में जो जीता वो सिकंदर, थोड़ा अटपटा लगता है। पर इसके मायने काफी गहरे हैं। आज हम बात कर रहे हैं रांची लोकसभा सीट की।
इस स्टोरी में हम जैसे जैसे आगे बढ़ेंगे, तो आपको पता चलेगा कि हम क्यों कह रहे हैं कि रांची में जो जीता वो सिकंदर।
दरअसल, रांची लोकसभा सीट पर 1998 यानी कि 26 साल के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला हो रहा है।
भाजपा के निवर्तमान सांसद संजय सेठ और कांग्रेस की यशस्विनी सहाय के बीच सीधा मुकाबला है।
झारखंड अलग राज्य बनने के बाद हुए चार चुनावों में लगातार दो बार कांग्रेस और लगातार दो बार भाजपा जीत चुकी है।
खास बात यह कि इस बार कांग्रेस ने सुबोधकांत सहाय को बदलकर उनकी बेटी यशस्विनी को उम्मीदवार बनाया है।
ये एक अजब संयोग है कि झारखंड बनने के बाद रांची में जिस दल का प्रत्याशी जीता उसी की सरकार बनी।
अलग झारखंड राज्य बनने के बाद पिछले चार चुनाव में रांची से जिस दल का प्रत्याशी जीता, केंद्र में उसी की सरकार बनती आ रही है।
केंद्र में वाजपेयी सरकार के बाद 2004 व 2009 में कांग्रेस के सुबोधकांत सहाय विजयी हुए थे। तब केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए की सरकार बनी थी।
2014 में भाजपा के रामटहल चौधरी और 2019 में संजय सेठ की जीत हुई। उस समय से केंद्र में भाजपा की मोदी सरकार है। अब इस चुनाव के फैसले का इंतजार है।
बात अब रांची लोकसभा सीट की तो, 2019 के चुनाव में संजय सेठ ने सुबोधकांत सहाय को 2.83 लाख वोटों से हराया था।
इस बार फिर वो पूरा दमखम लगा रहे हैं। उन्हें बीजेपी को कर वोटर्स पर पूरा भरोसा है। भाजपा की पकड़ शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में है।
पीएम मोदी का जादू भी यहां खूब चलता है। वहीं, इंडी गठबंधन की ग्रामीण इलाकों में स्थिति ज्यादा मजबूत है।
दोनों दलों ने प्रचार में पूरी ताकत झोंकी और आज कार्यकर्ता डोर-टू-डोर अभियान में जुटे हुए हैं। कांग्रेस का चुनाव अभियान ग्रामीण क्षेत्र से शुरू होने के बाद रांची शहरी क्षेत्र में पहुंच गया है।
पार्टी को मुस्लिम, ईसाई के साथ-साथ झामुमो, राजद और माले के मतदाताओं का समर्थन मिलने की उम्मीद है।
वहीं, भाजपा अपने कोर वोटरों पर भरोसा जताते हुए निश्चित दिख रही है। हालांकि, भाजपा ने आसान मानी जा रही रांची सीट जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
शायद इसका कारण यही है कि यशस्विनी सहाय ने जितनी तेजी से लोकप्रियता हासिल की और जो मेहनत वह कर रही हैं, उसने भाजपा को चौंकन्ना कर दिया है।
रांची में पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री का रोड शो हो चुका है। 22 मई को तेजस्वी सूर्या ने रांची में मोटरसाइकिल रैली निकाली।
पिछले चुनाव में भी संजय सेठ के पक्ष में पीएम नरेंद्र मोदी का रोड शो और गृह मंत्री अमित शाह की सभा हुई थी।
वहीं, हवा का रुख अपनी ओर मोड़ने के लिए इंडी गठबंधन ने भी 22 मई को प्रियंका गांधी, कल्पना सोरेन और सीएम चंपाई सोरेन ने सभा की है।
रांची में 25 मई को मतदान होगा। यहां 21,88,389 मतदाता 27 प्रत्याशियों के जीत-हार का फैसला करेंगे।
रांची लोकसभा सीट के अधीन छह विधानसभा क्षेत्र हैं। रांची, हटिया, कांके, सिल्ली, ईचागढ़ और खिजरी।
तीन सीट रांची, हटिया, कांके पर भाजपा और सिल्ली सीट पर सहयोगी पार्टी आजसू का कब्जा है।
चुनावी मुद्दों की बात करें, तो बीजेपी पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए कार्य, राज्य सरकार का भ्रष्टाचार, बांग्लादेश घुसपैठ, देश में मजबूत सरकार का वादा कर रही है।
वहीं, कंग्रेस सरना धर्म कोड, आरक्षण, नियोजन नीति, बेरोजगारी, महंगाई और केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग के मामले को मजबूती से उठा रही है।
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