एक शून्य से 14 कॉलेज हो गये मालामाल, बाकी के शिक्षक-कर्मचारी फंसे [ 14 colleges became rich with one zero, rest of the teachers and staff are stuck]

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रांची। झारखंड में सरकारी व्यवस्था में लापरवाही का एक अनोखा मामला सामने आया है। एक शून्य की गलती से 14 कॉलेज तो मालामाल हो गये, पर राज्य के 80 कॉलेजों के शिक्षक और कर्मचारी फंस गये हैं। दरअसल, झारखंड के 404 शिक्षण संस्थानों को वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए करीब 72 करोड़ रुपए अनुदान राशि दी गई। इनमें 137 इंटर कॉलेज, 211 हाई स्कूल, 30 संस्कृत विद्यालय और 26 मदरसा शामिल हैं। पैसे संबंधित संस्थानों के जिले की ट्रेजरी में भुगतान के लिए भेजे गये थे।

पर, 14 शिक्षण संस्थानों के लिए आवंटित राशि में एक शून्य लग जाने से मामला गड़बड़ा गया। आरटीसी इंटर कॉलेज ओरमांझी को अनुदान मद में 30 लाख रुपए देना था, उसके लिए ट्रेजरी में 3 करोड़ रुपए भेज दिए गए। वहीं, संत रॉबर्ट गर्ल्स हाईस्कूल हजारीबाग को 9.60 लाख का भुगतान करना था, पर उसके नाम पर 96 लाख रुपए जारी कर दिए गए। अनुदान से 8 करोड़ रुपए ज्यादा ट्रेजरी में भेज देने के कारण 404 संस्थानों को 88% ही भुगतान किया जा सका। बाकी राशि लैप्स हो गई।

इन संस्थानों के अनुदान राशि में एक शून्य अधिक लगा :

वित्त रहित जिन शिक्षण संस्थानों को ज्यादा राशि आवंटित की गई, उनमें कमला नेहरु इंटर कॉलेज रांची, जनता हाईस्कूल कर्रा, शहीद भगत सिंह हाईस्कूल झापा हजारीबाग, गर्ल्स हाईस्कूल बड़कागांव, संत रॉबर्ट गर्ल्स हाईस्कूल हजारीबाग, आदर्श हाईस्कूल चुरचु, छोटानागपुर हाईस्कूल बरकट्‌ठा, आदर्श हाईस्कूल बिष्णुगढ़, आरसी मिशन हाईस्कूल हजारीबाग, करियाटांड हाईस्कूल, रॉय एकेडमी गोविंदपुर, आरटीसी इंटर कॉलेज ओरमांझी और राजेंद्र महतो इंटर कॉलेज चास शामिल हैं।

राशि लैप्स, 12% राशि अगले साल मिलेगीः

वित्त रहित संघर्ष मोर्चा ने कहा कि 14 संस्थानों के नाम लगभग आठ करोड़ अधिक राशि जिला ट्रेजरी में भेजी गई। हालांकि संबंधित संस्थान को आवंटित राशि ही दी गई। पर, जिला ट्रेजरी में भेजी गई अधिक राशि लैप्स हो गई। इस कारण इस वर्ष 88% ही भुगतान किया जा सका है। शेष 12% भुगतान अगले वित्तीय वर्ष में होगा।

टाइपिंग में गड़बड़ी हुई: निदेशक

माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजेश प्रसाद सिंह ने जिला शिक्षा पदाधिकारियों को इस संबंध में पत्र लिखा है। कहा है कि टाइपिंग के दौरान अनुदान राशि में भूलवश एक शून्य अधिक लग जाने से ज्यादा राशि स्वीकृत हो गई है। ऐसे संस्थानों को आवंटित राशि के अनुसार ही भुगतान किया जाए।

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