निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक, 15 दिन में गठित होगी फीस निर्धारण कमेटी [Stop the arbitrariness of private schools, fee fixation committee will be formed in 15 days]

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आयुक्त और डीसी को निर्देश जारी

रांची। बजट सत्र के दौरान विधानसभा में निजी स्कूलों द्वारा फीस निर्धारण में मनमानी को लेकर उठे सवालों के बाद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इस पर नकेल कसने की पहल कर दी है। विभागीय सचिव उमाशंकर सिंह ने सभी प्रमंडलीय आयुक्त एवं जिला उपायुक्तों को पत्र लिख कर 15 दिनों के भीतर स्कूल, जिला और प्रमंडल स्तर पर स्कूल फीस समिति का गठन करने का निर्देश दिया है।

स्कूल फीस समिति का गठन झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2017 के आलोक में होगा। विभागीय सचिव ने अधिनियम की कॉपी भी संलग्न की है, जिसमें स्कूल फीस निर्धारण के प्रावधान की विस्तार से जिक्र है।

फीस निर्धारण कमेटी के गठन का इतिहासः

मनमाने ढंग से निजी स्कूलों द्वारा फीस निर्धारित किए जाते रहने के विरुद्ध झारखंड हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गयी थी। उस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 2013 में राज्य सरकार को स्कूल फीस निर्धारण कमेटी के गठन का आदेश दिया। कोर्ट के उस आदेश के आलोक में झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण को शुल्क निर्धारण के कमेटियों के गठन के लिए अधिनियमित किया गया। लेकिन, राज्य की इस कार्यवाही के विरुद्ध हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गयी।

डीबीएमएस कदमा बनाम स्टेट ऑफ झारखंड एंड अदर्स के मामले में दायर कुल 36 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 13 मार्च 2024 को सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। इसके बाद पिछले दिनों विधानसभा में निजी स्कूलों द्वारा मनमाने फीस निर्धारण का मामला उठा। विभागीय मंत्री रामदास सोरेन ने सदन को आश्वस्त किया था कि निजी विद्यालयों द्वारा मनमाने ढंग से फीस निर्धारण पर अंकुश लगाया जाएगा।

अब कमेटियां करेंगी स्कूल फीस का निर्धारणः

झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण अधिनियम 2017 के प्रावधान के अनुसार अब स्कूल स्तर पर कमेटी का गठन होगा। कमेटी फीस वृद्धि के उचित कारणों को देखेगी। उसमें स्कूल द्वारा उपलब्ध करायी जा रही सुविधाओं, शिक्षक-कर्मचारियों के वेतन व अन्य आवश्यक कारणों को देखेगी। साथ ही विद्यालय में गुणवत्ता युक्त शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को उपलब्ध करायी जा रही सुविधा, विद्यालयों को ट्युशन फी से प्राप्त होनेवाली आय व अन्य चीजों को देखेगी। फिर समिति प्रस्तावित शुल्क की संरचना प्राप्त होने के 30 दिन के अंदर फीस की मंजूरी देगी।

विद्यालय स्तर की कमेटी में ये होंगे शामिलः

विद्यालय स्तर पर शुल्क निर्धारण के लिए गठित कमेटी में बच्चों के अभिभावक के साथ शिक्षक भी शामिल होंगे। निजी विद्यालय प्रबंधन द्वारा मनोनीत प्रतिनिधि कमेटी के अध्यक्ष होंगे। विद्यालय के प्राचार्य, सचिव, विद्यालय प्रबंधन द्वारा मनोनीत तीन शिक्षक व शिक्षक संघ द्वारा नामित चार माता-पिता इसके सदस्य होंगे।

विद्यालय प्रबंधन को फीस निर्धारण के एजेंडा और बैठक की जानकारी एक सप्ताह पहले देनी होगी। विद्यालय समिति अगर तय समय में शुल्क निर्धारण में विफल रहती है तो प्रबंधन यह प्रस्ताव जिलास्तरीय कमेटी के समक्ष रखेगा। विद्यालय में अगर पिछले वर्ष की तुलना में 10 फीसदी से अधिक फीस बढ़ोतरी की जाती है, तो भी इसको जिला कमेटी को भेजा जायेगा।

जिलास्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित होगी कमेटीः

जिलास्तर पर डीसी की अध्यक्षता में कमेटी गठित होगी। कमेटी में डीएसई, डीईओ, डीटीओ, निजी विद्यालयों के दो प्रिंसपल, संबंधित क्षेत्र के सांसद, विधायक और दो अभिभावकों के अलावा एक चार्टर्ड एकाउंटेंड भी होगा। विद्यालय अगर जिलास्तरीय कमेटी के निर्णय से संतुष्ट नहीं है, तो प्रमंडलीय आयुक्त के समक्ष इसके खिलाफ अपील कर सकते हैं।

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