Gas cylinder price hike protest
रांची। घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद झारखंड में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को इस फैसले के लिए जिम्मेदार ठहराया है, जबकि भाजपा ने बढ़ती वैश्विक परिस्थितियों को इसका कारण बताया है। हाल ही में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में लगभग 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर में करीब 120 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिससे आम लोगों के बजट पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
झामुमो का केंद्र पर आरोप
Jharkhand Mukti Morcha (झामुमो) के प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी कोई नई बात नहीं है। उनका कहना है कि वर्ष 2014 के बाद से ही कीमतों में लगातार इजाफा होता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वैश्विक संकटों को बहाना बनाकर आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ाई जा रही हैं। पांडे ने कहा कि आम लोगों पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
कांग्रेस ने बताया आम लोगों पर हमला
वहीं Indian National Congress के प्रदेश प्रवक्ता लाल किशोरनाथ शाहदेव ने गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी को तुरंत वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि देश पिछले कई वर्षों से महंगाई की मार झेल रहा है और इससे आम लोगों का घरेलू बजट बिगड़ रहा है।
कांग्रेस के मीडिया विभाग के चेयरमैन सतीश पॉल मुंजानी ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि रसोई गैस के दाम बढ़ाकर गरीब और मध्यम वर्ग पर अतिरिक्त बोझ डाला गया है। उन्होंने कहा कि जब सरकारी कंपनियां खुद यह कह चुकी हैं कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है, तो फिर कीमतें बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी।
राजद ने भी उठाए सवाल
Rashtriya Janata Dal (राजद) के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी से आम आदमी के खर्चों में और वृद्धि होगी। उन्होंने केंद्र सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया जाता है।
भाजपा ने दिया जवाब
वहीं Bharatiya Janata Party के प्रदेश प्रवक्ता अविनेश कुमार सिंह ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात बेहद संवेदनशील हैं। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण यह फैसला लेना पड़ा है।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार कोशिश कर रही है कि अंतरराष्ट्रीय संकट का असर देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर कम से कम पड़े। जैसे ही हालात सामान्य होंगे, कीमतों में राहत मिलने की संभावना है।








