Jharkhand Heat Island Effect:
रांची। जलवायु परिवर्तन और तेज़ शहरीकरण के बीच Jharkhand के प्रमुख शहरों में अर्बन हीट आईलैंड का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। वन विभाग द्वारा 1984 से 2024 तक के आंकड़ों पर आधारित हालिया अध्ययन में खुलासा हुआ है कि शहरी और ग्रामीण इलाकों के तापमान में 1.5 से 2 डिग्री सेल्सियस तक का अंतर दर्ज किया गया है। यह रिपोर्ट केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से तैयार की गई है।
रांची-जमशेदपुर में सबसे अधिक असर
अध्ययन के अनुसार Ranchi और Jamshedpur में तापमान का अंतर सबसे अधिक पाया गया है। खासकर जमशेदपुर में मानव स्वास्थ्य पर जोखिम अधिक बढ़ा है। वहीं Dhanbad और Hazaribagh में यह अंतर अपेक्षाकृत कम, करीब 0.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
डब्ल्यूबीजीटी में बढ़ोतरी से खतरा
रिपोर्ट में वेट-बल्ब ग्लोब टेंपरेचर (WBGT) के स्तर में वृद्धि को गंभीर चिंता का विषय बताया गया है। तापमान, आर्द्रता, हवा की गति और सौर विकिरण को मिलाकर आंका जाने वाला यह सूचकांक खुले में काम करने वाले मजदूरों और आम लोगों के लिए बढ़ते स्वास्थ्य जोखिम का संकेत दे रहा है।
कारण क्या हैं?
रिपोर्ट के मुताबिक तेज शहरीकरण, हरित आवरण में कमी, जलस्रोतों का खत्म होना और कंक्रीट संरचनाओं का विस्तार मुख्य वजह हैं। बिल्ट-अप एरिया बढ़ने और पेड़-पौधों की कमी ने शहरों को आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में ज्यादा गर्म बना दिया है।
क्या हैं सिफारिशें?
सरकार को अर्बन फॉरेस्ट्री कार्यक्रम शुरू करने, ग्रीन बिल्डिंग को अनिवार्य बनाने, इको-होम को बढ़ावा देने और क्लीन ट्रांसपोर्ट पॉलिसी लागू करने की सलाह दी गई है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और ग्रीन बिल्डिंग मैनुअल की सख्त मॉनिटरिंग पर भी जोर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस अध्ययन का उद्देश्य नीति-निर्माताओं और आम नागरिकों के बीच जलवायु परिवर्तन के खतरों को लेकर जागरूकता बढ़ाना है, ताकि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जा सकें।







