पलामू, एजेंसियां। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पलामू, गढ़वा और लातेहार की महिलाओं को 1,000 रुपए की सौगात दी।
उन्होंने गुरुवार को यहां रिमोट का बटन दबाकर योजना के लिए निबंधित पलामू प्रमंडल के तीनों जिलों की महिलाओं के खाते में 1,000-1,000 रुपए ट्रांसफर किए।
रांची हेडक्वार्टर से चलने वाली ये सरकार नहीः हेमंत
रक्षा बंधन की पूर्व संध्या पर संथाल परगना के पाकुड़ से इस योजना का हेमंत सोरेन ने शुभारंभ किया था। पाकुड़ के बाद वह पलामू पहुंचे।
चियांकी में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए हेमंत सोरेन ने कहा कि हमारी महागठबंधन की सरकार रांची हेडक्वार्टर से चलने वाली सरकार नहीं है। यह सरकार गांव-देहात से चलने वाली सरकार है।
20 साल तक कई इलाकों में अधिकारी नहीं गए
उन्होंने कहा कि राज्य गठन के 20 साल बाद भी बहुत से ऐसे इलाके हैं, जहां आज तक कोई अधिकारी नहीं गया। लेकिन, हमारी सरकार ने फैसला किया है कि हमारी सरकार गांव से चलेगी।
इसलिए हमने गांव-गांव में शिविर लगाकर आपकी समस्याओं का समाधान किया। उन्होंने कहा कि ये लोग हमको जमीन माफिया, जमीन चोर बोलते थे। इसी आरोप में मुझे जेल भेज दिया।
इन लोगों के पास झारखंड में कोई नेता नहीं है। ये लोग असम और मध्यप्रदेश से नेता लाते हैं।
पार्टियों को तोड़ने का काम करते हैं। गलतबयानी करते हैं। हमारी सरकार को रोकने के लिए दिन-रात षड्यंत्र करते रहते हैं।
मंईयां सम्मान योजना के लिए पहली बार गांवों में नहीं लगे शिविर
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के लिए पहली बार शिविर नहीं लगे। इसके पहले भी पदाधिकारियों ने टोला, पंचायत में जाकर शिविर लगाये और गरीबों एवं बुजुर्गों की समस्याओं को सुना और उसका समाधान किया।
जिन समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया, वो हमारे पास पहुंची। हम उनका समाधान करने में लगे हैं। इसी कड़ी में हमने कई योजनाओं को गांव तक पहुंचाया।
हमने जो काम 4 साल में किए, ये लोग 50 साल में भी नहीं कर पाएंगे
हेमंत सोरेन ने कहा कि हमने विकास की जो लकीर खींची है, उसे 20 साल में तो क्या कोई 50 साल में भी नहीं कर पाएगा।
कोरोना का संकट खत्म हुआ, तो भाजपा के लोगों ने हमारी सरकार गिराने के षड्यंत्र शुरू कर दिए।
हमें दो-ढाई साल तक परेशान किया। जेल में भी डाल दिया। लेकिन, भगवान के घर में अंधेर नहीं होता है।
सच्चाई छुप नहीं सकी। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हम आप लोगों के बीच में हैं। हमारे काम से ये लोग घबरा गए।
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