Lung cancer:
नई दिल्ली, एजेंसियां। हर साल 1 अगस्त को विश्वभर में लंग कैंसर डे मनाया जाता है ताकि लोगों को इस जानलेवा बीमारी से जागरूक किया जा सके। फेफड़ों का कैंसर दुनिया भर में लाखों लोगों की मौत का कारण है, लेकिन समय रहते जांच और सही इलाज से इससे बचाव संभव है।
विशेषज्ञ के अनुसार
विशेषज्ञ के अनुसार, लंग कैंसर की जांच के लिए कई तरह की प्रक्रियाएं होती हैं। यदि किसी व्यक्ति को लक्षण जैसे खांसी, सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द या खून आना दिखाई दे, तो डॉक्टर पहले शारीरिक जांच करते हैं। इसके बाद X-रे और CT स्कैन कर फेफड़ों की स्थिति देखी जाती है।ब्रोंकोस्कोपी नामक प्रक्रिया में एक पतली ट्यूब नाक या मुंह के जरिए फेफड़ों तक पहुंचाई जाती है, जिससे अंदर के हिस्से को देखा जाता है। संदिग्ध ट्यूमर मिलने पर बायोप्सी की जाती है, जिसमें ट्यूमर का नमूना लेकर जांच की जाती है। PET स्कैन से पता चलता है कि कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैला है या नहीं।
लंग कैंसर के स्टेज और उपचार:
स्टेज 1: कैंसर केवल फेफड़ों तक सीमित होता है, इस चरण में इलाज से पूरी तरह ठीक होने की संभावना होती है।
स्टेज 2 और 3: कैंसर लिम्फ नोड्स तक फैल चुका होता है, इलाज से जीवनकाल बढ़ाया जा सकता है, लेकिन पूरी तरह ठीक होना मुश्किल होता है।
स्टेज 4: कैंसर शरीर के अन्य अंगों में फैल चुका होता है, इस स्थिति में इलाज लक्षणों में राहत और जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने तक सीमित रहता है।
समय पर जांच और उपचार से लंग कैंसर की जान बचाई जा सकती है। शुरुआती स्टेज में निदान होने पर उपचार के अच्छे परिणाम मिलते हैं। इसलिए, लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करें और नियमित जांच कराएं।
इसे भी पढ़ें
Health Tips: पेट दर्द से न लें हल्के में, हो सकता है गंभीर बीमारी का संकेत
