PM Modi blog: पीएम मोदी ने काशी तमिल संगमम पर लिखा ब्लॉग, ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ पर साझा किए विचार

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नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘काशी तमिल संगमम’ को लेकर एक विस्तृत ब्लॉग लिखा है, जिसमें उन्होंने भारत की सांस्कृतिक एकता, ऐतिहासिक संबंधों और राष्ट्रीय चेतना पर अपने विचार साझा किए हैं। पीएम मोदी ने अपने ब्लॉग में कहा कि काशी तमिल संगमम ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना का सशक्त और जीवंत उदाहरण है, जो देश की विविध संस्कृतियों को एक सूत्र में पिरोता है।

सोमनाथ से काशी तक सांस्कृतिक चेतना

प्रधानमंत्री ने ब्लॉग की शुरुआत हाल ही में सोमनाथ में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अनुभव से की। उन्होंने कहा कि वर्ष 1026 में सोमनाथ पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष पूरे होने पर आयोजित यह पर्व भारतवासियों के साहस, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। इसी दौरान उनकी मुलाकात ऐसे लोगों से हुई, जो पहले सौराष्ट्र-तमिल संगमम और काशी-तमिल संगमम में भाग ले चुके थे, जिससे उन्हें इस विषय पर अपने विचार साझा करने की प्रेरणा मिली।

तमिल संस्कृति और काशी का ऐतिहासिक संबंध

पीएम मोदी ने तमिल भाषा और संस्कृति की प्रशंसा करते हुए कहा कि तमिल भारत की सबसे प्राचीन और समृद्ध भाषाओं में से एक है। उन्होंने स्वीकार किया कि तमिल भाषा नहीं सीख पाने का उन्हें आज भी दुख है। प्रधानमंत्री ने काशी और तमिलनाडु के ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए रामेश्वरम, तेनकासी, महाकवि सुब्रमण्यम भारती और कुमारगुरुपरर स्वामिजी जैसे उदाहरण दिए।

काशी तमिल संगमम का विस्तार और उपलब्धियां

प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्ष 2022 में शुरू हुए काशी तमिल संगमम के बाद इसके हर संस्करण को नई थीम और नवाचार के साथ आगे बढ़ाया गया। वर्ष 2025 में आयोजित चौथे संस्करण की थीम ‘तमिल करकलम्’ रही, जिसमें लोगों को तमिल भाषा सीखने का अवसर मिला। इसके साथ ही शैक्षिक सत्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियां और तकनीकी संवाद भी आयोजित किए गए।

युवाओं की भागीदारी और राष्ट्रीय एकता

पीएम मोदी ने युवाओं की सक्रिय भागीदारी को इस आयोजन की सबसे बड़ी सफलता बताया। उन्होंने काशी और उत्तर प्रदेश के लोगों की अतिथि सत्कार भावना की सराहना की। अंत में प्रधानमंत्री ने संक्रांति, पोंगल, उत्तरायण और माघ बिहू जैसे पर्वों की शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि ऐसे आयोजन भारत की एकता और सांस्कृतिक विरासत को और मजबूत करेंगे।

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