Lack of sleep effects on brain
नई दिल्ली, एजेंसियां। नींद सिर्फ आराम का जरिया नहीं है, बल्कि यह हमारे दिमाग और शरीर के लिए एक रीसेट बटन का काम करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, हर रात 7-8 घंटे की पर्याप्त नींद लेना जरूरी है। लेकिन आधुनिक जीवनशैली में लोग अक्सर कम सोते हैं, जिससे उनके दिमाग और सेहत पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
- याददाश्त और सीखने की क्षमता प्रभावित
नींद के दौरान हमारा दिमाग दिन भर की यादों और जानकारी को ‘सेव’ करता है, जिसे Memory Consolidation कहते हैं। पर्याप्त नींद न लेने पर हिप्पोकैम्पस, जो नई यादें बनाने में मदद करता है, ठीक से काम नहीं करता। इसका असर यह होता है कि नई जानकारी को याद रखना मुश्किल हो जाता है और सीखने की क्षमता घट जाती है।
- एकाग्रता और निर्णय लेने में समस्या
नींद की कमी का असर प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स पर पड़ता है, जो तर्क, योजना और निर्णय लेने के लिए जिम्मेदार है। कम नींद लेने वाले लोग छोटे-छोटे फैसलों में उलझ सकते हैं और उनका ध्यान बार-बार भटकने लगता है। शोध बताते हैं कि 24 घंटे तक न सोना वैसा ही है जैसे शरीर में 0.10% अल्कोहल का स्तर होना, यानी आप बिना शराब पिए नशे जैसी स्थिति में होते हैं।
- भावनात्मक अस्थिरता और मानसिक तनाव
नींद की कमी से दिमाग का इमोशनल सेंटर, एमीग्डाला, अधिक सक्रिय हो जाता है। इसका असर यह होता है कि छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा, तनाव या उदासी महसूस होती है। लोग जल्दी चिड़चिड़े और मानसिक रूप से अस्थिर हो जाते हैं।
- अल्जाइमर और दिमागी टॉक्सिन का खतरा
गहरी नींद के दौरान Glymphatic System सक्रिय होता है, जो दिमाग से बीटा-एमाइलॉयड और अन्य जहरीले प्रोटीन निकालता है। लगातार कम नींद लेने पर ये टॉक्सिन्स दिमाग में जमा होने लगते हैं, जिससे भविष्य में अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञ की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि नींद की कमी सिर्फ थकान नहीं बल्कि दिमाग और शरीर दोनों के “हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर” को प्रभावित करती है। याददाश्त, निर्णय क्षमता, मानसिक स्थिरता और न्यूरोलॉजिकल हेल्थ सभी पर इसका असर पड़ता है। इसलिए हर व्यक्ति को रोजाना पर्याप्त नींद लेने की आदत बनानी चाहिए और खराब जीवनशैली को बदलने पर ध्यान देना चाहिए।








