किडनी की दवा बांझपन के इलाज में असरदार! नई रिसर्च में बड़ा दावा

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Infertility treatment research

नई दिल्ली, एजेंसियां। बांझपन के इलाज को लेकर वैज्ञानिकों ने एक अहम खोज की है। एक नई रिसर्च के मुताबिक, क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) और हार्ट फेलियर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा फाइनरेनोन (Finerenone) समय से पहले ओवेरियन इनसफिशिएंसी (Premature Ovarian Insufficiency – POI) के उपचार में भी प्रभावी साबित हो सकती है। यह शोध जापान की जुंटेंडो यूनिवर्सिटी और हांगकांग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की टीम ने किया है और इसे अमेरिकी जर्नल Science के इलेक्ट्रॉनिक एडिशन में प्रकाशित किया गया है।

क्या है समय से पहले ओवेरियन इनसफिशिएंसी?

इस स्थिति में महिलाओं के पीरियड्स 40 वर्ष की आयु से पहले ही बंद हो जाते हैं, जिससे गर्भधारण की संभावना काफी कम हो जाती है। इस समस्या में ओवेरियन फाइब्रोसिस (Ovarian Fibrosis) हो जाता है, जो फॉलिकल ग्रोथ को रोकता है।

कैसे काम करती है फाइनरेनोन?

फाइनरेनोन दवा किडनी और हार्ट टिश्यू में फाइब्रोसिस को रोकने के लिए जानी जाती है। वैज्ञानिकों ने पाया कि यह दवा ओवरी में होने वाले फाइब्रोसिस को भी कम कर सकती है, जिससे फॉलिकल ग्रोथ को बढ़ावा मिलता है।

जुंटेंडो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर काज़ुहिरो कवामुरा ने कहा कि उनका लक्ष्य ओवरी स्टिमुलेशन को बेहतर बनाना और ज्यादा प्रभावी दवाएं खोजना है, ताकि इनफर्टिलिटी के इलाज में नई राह खुल सके।

क्लिनिकल ट्रायल में मिले सकारात्मक नतीजे

एक क्लिनिकल ट्रायल में POI से पीड़ित मरीजों को फाइनरेनोन दी गई, साथ ही ओवरी स्टिमुलेशन और ओवम मैच्योरिटी की दवाओं का उपयोग किया गया। इसके परिणामस्वरूप इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) के जरिए सफलतापूर्वक निषेचित अंडा प्राप्त हुआ।

पशु-अध्ययन से भी मिली पुष्टि

मानव परीक्षण से पहले चूहों पर अध्ययन किया गया। जिन चूहों को यह दवा दी गई, उनमें सामान्य से अधिक संतानों का जन्म हुआ और किसी तरह की असामान्यता नहीं पाई गई।

1,300 दवाओं की जांच के बाद मिली सफलता

शोधकर्ताओं ने पहले 2013 में “इन विट्रो एक्टिवेशन” तकनीक विकसित की थी, लेकिन इसमें सर्जरी और जनरल एनेस्थीसिया की आवश्यकता होती थी। इसके विकल्प के रूप में वैज्ञानिकों ने लगभग 1,300 दवाओं की जांच की और अंततः फाइनरेनोन को सबसे प्रभावी पाया।

क्या बदल सकता है?

अगर आगे के परीक्षणों में भी यह दवा सुरक्षित और प्रभावी साबित होती है, तो यह इनफर्टिलिटी के इलाज में एक नई, कम जोखिम वाली ओरल थेरेपी का रास्ता खोल सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस दवा को बांझपन के नियमित इलाज के रूप में अपनाने से पहले बड़े स्तर पर और क्लिनिकल ट्रायल की जरूरत होगी।

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