Heart attack recovery advice: हार्ट अटैक आने पर कितनी प्रतिशत होती है बचने की संभावना? जानिए डॉक्टर की सलाह और फौरन किए जाने वाले जरूरी कदम

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Heart attack recovery advice

नई दिल्ली, एजेंसियां। आजकल हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन राहत की बात यह है कि सही समय पर इलाज मिलने से मरीज के बचने की संभावना पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, हार्ट अटैक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें हर मिनट बेहद कीमती होता है। समय पर पहचान और तुरंत इलाज जान बचा सकता है।

कितने प्रतिशत रहता है बचने का चांस?

नोएडा स्थित मेदांता अस्पताल के डायरेक्टर (इलेक्ट्रोफिज़ियोलॉजी एवं इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी) डॉ. अमित कुमार मलिक बताते हैं कि हार्ट अटैक के बाद मरीज के बचने की संभावना कई बातों पर निर्भर करती है। यदि मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचा दिया जाए और सही इलाज मिल जाए, तो सर्वाइवल रेट काफी अच्छा रहता है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के कारण आज हार्ट अटैक में मृत्यु दर घटकर लगभग 5 से 10 प्रतिशत तक रह गई है।

‘गोल्डन आवर’ क्यों है सबसे महत्वपूर्ण?

हार्ट अटैक के लक्षण शुरू होने के पहले एक घंटे को ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है। इस दौरान मरीज को अस्पताल पहुंचाकर एंजियोप्लास्टी या जरूरी दवाएं दे दी जाएं, तो दिल की मांसपेशियों को होने वाला स्थायी नुकसान रोका जा सकता है। यही समय मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाता है।

तुरंत क्या करें, जिससे बच जाए जान?

हार्ट अटैक के लक्षण जैसे सीने में तेज दर्द, पसीना आना, सांस फूलना या बाएं हाथ में दर्द दिखते ही तुरंत एंबुलेंस बुलाएं। मरीज को शांत रखें और ढीले कपड़े पहनाएं। जब तक मेडिकल मदद न पहुंचे, तब तक सीपीआर (CPR) देना बेहद कारगर साबित हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर आम लोग सीपीआर की तकनीक सीख लें, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

जागरूकता और लाइफस्टाइल से घटेगा खतरा

नियमित हेल्थ चेकअप, संतुलित आहार, व्यायाम और तनाव से दूरी हार्ट अटैक के जोखिम को कम कर सकती है। लक्षणों की समय पर पहचान और तुरंत सही कदम ही हार्ट अटैक में जीवन रक्षक साबित होते हैं।

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