Loneliness cancer risk
नई दिल्ली, एजेंसियां। कैंसर दुनियाभर में तेजी से बढ़ती जानलेवा बीमारियों में से एक है। परंपरागत रूप से इसके मुख्य कारणों में धूम्रपान, खराब खान-पान, मोटापा और प्रदूषण शामिल होते हैं। लेकिन हाल ही में हुए शोध में यह खुलासा हुआ है कि अकेलापन और सोशल आइसोलेशन भी कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
चीन के वैज्ञानिकों के अध्ययन के अनुसार, जो लोग अक्सर अकेले रहते हैं, उनका सामाजिक संपर्क सीमित होता है और वे परिवार या दोस्तों से कम मिलते-जुलते हैं, उनमें कैंसर विकसित होने की संभावना अधिक होती है। शोध में पाया गया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह खतरा ज्यादा देखा गया है। अध्ययन में शामिल 35,000 से अधिक वयस्कों के डेटा को एनालाइज किया गया और 12 साल तक फॉलो-अप के दौरान अकेलेपन का कैंसर से जुड़ाव स्पष्ट हुआ।
अकेलापन और सोशल आइसोलेशन ही कारण नहीं हो सकते
अकेलापन और सोशल आइसोलेशन केवल कैंसर ही नहीं, बल्कि कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनते हैं। अमेरिकी विशेषज्ञों के अनुसार, अकेलेपन के घातक दुष्प्रभाव एक दिन में 15 सिगरेट पीने के बराबर हो सकते हैं। यह डिमेंशिया, स्ट्रोक और कोरोनरी आर्टरी डिजीज के जोखिम को भी बढ़ाता है। मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ता है, जिससे तनाव, डिप्रेशन और जीवनशैली की गड़बड़ियाँ होती हैं।
शोध के प्रमुख लेखक डॉ. जियाहाओ चेंग का कहना है कि अकेलापन और सोशल आइसोलेशन क्रोनिक स्ट्रेस रिस्पॉन्स को ट्रिगर करते हैं। इससे इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, इंफ्लेमेशन बढ़ती है और ट्यूमर को बढ़ावा देने वाले हार्मोनल बदलाव भी होते हैं। इसके अलावा, अकेले रहने वाले लोग स्मोकिंग, असंतुलित खान-पान और कम व्यायाम जैसी आदतों के अधिक शिकार होते हैं, जिससे कैंसर का खतरा और बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना
विशेषज्ञों का कहना है कि हेल्थ पॉलिसी और सामाजिक योजनाओं के माध्यम से सोशियो-इकोनॉमिक चुनौतियों, मेंटल हेल्थ और लाइफस्टाइल सुधार पर ध्यान दिया जाए तो अकेलेपन से होने वाले कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है। इसके लिए लोगों को जागरूक करना और सामाजिक संपर्क बनाए रखना आवश्यक है।








