Election Commission:
पटना, एजेंसियां। बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट के इंटेंस रिवीजन (Special Intense Revision) को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस रिवीजन में लोगों को अपनी नागरिकता साबित करनी होगी, ताकि केवल भारतीय नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल हों। संविधान के आर्टिकल 326 के तहत वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने के लिए नागरिकता अनिवार्य है।
Election Commission:बिहार चुनाव आयोग
बिहार चुनाव आयोग ने इस बार वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या अपडेट करने के लिए 11 दस्तावेजों की सूची जारी की है, जिनमें पेंशन का कागज, सरकारी पहचान पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट, निवास प्रमाण पत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, एनआरसी, परिवार रजिस्टर या जमीन के कागज शामिल हैं। लेकिन चुनाव आयोग ने आधार कार्ड, वोटर कार्ड, मनरेगा कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और राशन कार्ड जैसे आमतौर पर पहचान के लिए उपयोग किए जाने वाले दस्तावेजों को वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। आयोग का कहना है कि ये दस्तावेज केवल पहचान के लिए सही हो सकते हैं, लेकिन ये आपकी नागरिकता साबित नहीं करते।
Election Commission:बिहार के कई लोग समझने में असमंजस में हैं
इस वजह से बिहार के कई लोग यह समझने में असमंजस में हैं कि आखिर आयोग आधार या राशन कार्ड जैसे दस्तावेज क्यों नहीं स्वीकार कर रहा। बिहार में हर नागरिक को वोटर लिस्ट में शामिल होने के लिए या नाम अपडेट करने के लिए या तो पहले से नाम दर्ज होना चाहिए और सिर्फ फॉर्म भरना होगा, या अगर नाम नहीं है तो दिए गए वैध दस्तावेजों में से किसी एक के साथ आवेदन करना होगा।
Election Commission:चुनाव आयोग का यह कदम
चुनाव आयोग का यह कदम मुख्य रूप से वोटर लिस्ट में फर्जी नामों को रोकने और सही नागरिकों को ही मतदाता सूची में शामिल करने के उद्देश्य से उठाया गया है। हालांकि, इस नीति को लेकर कई सवाल और आलोचनाएं भी उठ रही हैं। बिहार में यह प्रक्रिया विधानसभा चुनाव से पहले चल रही है और इसके नतीजे आने वाले महीनों में सामने आएंगे।
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