CBSE Practical exams: CBSE ने प्रैक्टिकल्स परीक्षाओं में बढ़ाई पारदर्शिता, अब हर गलती पर स्कूल को देना होगा जवाब

Anjali Kumari
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CBSE Practical exams:

नई दिल्ली, एजेंसियां। आगामी बोर्ड परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने प्रैक्टिकल परीक्षाओं के संचालन और मार्क्स अपलोडिंग प्रक्रिया को लेकर सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 और 12 के प्रैक्टिकल एग्जाम 1 जनवरी से 14 फरवरी के बीच अनिवार्य रूप से संपन्न कर लिए जाने चाहिए। इसके साथ ही स्कूलों को सभी प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता और सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

मार्क्स अपलोडिंग में जीरो टॉलरेंस, गलती पर स्कूल की जवाबदेही


CBSE ने कहा है कि प्रैक्टिकल मार्क्स अपलोडिंग में किसी भी प्रकार की त्रुटि चाहे वह गलत रोल नंबर हो, गलत विषय कोड हो या डिजिट एंट्री की गलती की पूरी जिम्मेदारी संबंधित स्कूल की होगी। एक बार मार्क्स ऑनलाइन पोर्टल पर फाइनल रूप से अपलोड हो जाने के बाद उसमें किसी प्रकार का संशोधन संभव नहीं होगा।


बोर्ड ने यह भी याद दिलाया कि पूर्व वर्षों में इसी तरह की छोटी गलतियों से परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित हुई थी, इसलिए अब प्रत्येक स्कूल को डेटा अपलोड करने से पहले दो-स्तरीय सत्यापन प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य होगा।

स्कूलों को हर प्रैक्टिकल के फोटो और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश


नई गाइडलाइन के तहत CBSE ने सभी स्कूलों से कहा है कि प्रत्येक प्रैक्टिकल परीक्षा से जुड़े फोटो, उपस्थिति रजिस्टर और आवश्यक दस्तावेज संरक्षित रखें। बोर्ड किसी भी समय इन दस्तावेजों की जांच कर सकता है।
इसके साथ ही स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि प्रयोगशाला संसाधन, उपकरण और मशीनरी पहले से तैयार रखें ताकि परीक्षाएं व्यवस्थित रूप से संपन्न हो सकें।

नई गाइडलाइन में क्या है खास?


CBSE द्वारा जारी दिशानिर्देशों में निम्न बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया है—
• विषयवार मार्क्स वितरण
• इंटरनल असेसमेंट के नियम
• प्रैक्टिकल परीक्षा की संरचना और वेटेज
• बाहरी परीक्षकों की भूमिका
• सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का प्रावधान
हर प्रैक्टिकल के बाद वेरिफिकेशन प्रोटोकॉल के साथ ही मार्क्स अपलोडिंग की जाएगी।

पारदर्शिता और अनुशासन पर CBSE का जोर:

CBSE ने कहा है कि सभी शिक्षक और बाहरी परीक्षक नई गाइडलाइंस से अवगत हों। उद्देश्य है प्रैक्टिकल परीक्षाओं में अनुशासन, पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करना, ताकि छात्रों को किसी भी तरह की मार्किंग त्रुटि से नुकसान न उठाना पड़े।

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