DSPMU:
रांची। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU), रांची में शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर छात्रों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। कई प्रोफेसरों पर एक साथ दो से तीन विभागों का अतिरिक्त बोझ डाला गया है, जिससे शिक्षकों पर काम का दबाव बढ़ गया है और इसका सीधा असर कक्षाओं की गुणवत्ता और शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ रहा है। छात्र बताते हैं कि कई बार कक्षाएं तय समय पर शुरू नहीं हो पातीं, जबकि कई बार विषय विशेषज्ञ मौजूद नहीं रहते, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है। प्रोफेसर एक विभाग से दूसरे विभाग में लगातार भागते रहते हैं, जिससे नियमित पढ़ाई और संपूर्ण शैक्षणिक अनुभव बाधित होता है।
छात्रों की मांग
छात्रों की मांग है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से ले और जल्द से जल्द स्थायी समाधान निकाले। वे चाहते हैं कि विभागवार पर्याप्त संख्या में फैकल्टी नियुक्त की जाए ताकि शिक्षकों का बोझ कम हो और पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर हो सके। वर्तमान में अतिरिक्त जिम्मेदारियों के कारण प्रोफेसर अपनी पूरी क्षमता के साथ पढ़ाई और शोध कार्य नहीं कर पा रहे हैं, जिससे छात्र भी लंबे समय तक प्रभावित हो रहे हैं।
छात्र प्रशासन
छात्र प्रशासन से नाराज हैं क्योंकि वे लंबे समय से इस समस्या को लेकर अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन विश्वविद्यालय की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। छात्रों का कहना है कि जब तक पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होगी, तब तक शैक्षणिक स्तर में सुधार नहीं हो सकता और शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होती रहेगी। विश्वविद्यालय की छवि और छात्रों के भविष्य दोनों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
इसलिए यह जरूरी है कि DSPMU प्रशासन शीघ्र ही इस समस्या का समाधान निकाले, ताकि छात्र बिना किसी बाधा के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें और प्रोफेसर भी अपने दायित्वों को ठीक प्रकार निभा सकें। यह कदम विश्वविद्यालय के समग्र विकास के लिए अहम होगा।
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