Land for Job Case: लालू परिवार के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश टला, अब 8 दिसंबर को होगी सुनवाई

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Land for Job Case:

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने नौकरी के बदले जमीन (लैंड फॉर जॉब) घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के खिलाफ आरोप तय करने पर फैसला फिलहाल टाल दिया है। कोर्ट ने सीबीआई को सभी आरोपियों का स्टेटस वेरिफाई कर रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है, क्योंकि इस मामले में चार आरोपियों की मौत हो चुकी है। अब अगली सुनवाई 8 दिसंबर को होगी। उसी दिन आरोप तय होने पर अंतिम निर्णय की उम्मीद है।

क्या हुआ आज की सुनवाई में:

4 दिसंबर को विशेष सीबीआई जज विशाल गोगने ने आरोप तय करने के आदेश को स्थगित कर दिया। इससे पहले 10 नवंबर को सुनवाई के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा था, जिसे आज सुनाया जाना था। लेकिन रिपोर्ट लंबित होने के कारण मामला 8 दिसंबर तक बढ़ा दिया गया।

8 दिसंबर को बड़ा फैसला संभव:

अगर अदालत को आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार मिलता है, तो यह लालू परिवार के लिए बड़ी कानूनी चुनौती बन सकती है। वहीं सबूतों के अभाव में आरोप तय न होने पर लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती और हेमा यादव को राहत मिल सकती है।

क्या है लैंड फॉर जॉब मामला:

यह मामला वर्ष 2004 से 2009 के बीच रेलवे में हुई नियुक्तियों से जुड़ा है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे।
सीबीआई के अनुसार पटना के कई लोगों को ग्रुप डी में गुप्त रूप से नौकरी दी गई। इसके बदले उनसे लालू परिवार के नाम जमीन लिखवाई गई। जमीन की रजिस्ट्री कथित तौर पर राबड़ी देवी, मीसा भारती और हेमा यादव के नाम हुई। जमीन की कीमत बहुत कम दिखाई गई और भुगतान नकद में हुआ। जिन पदों पर भर्ती हुई, उसका न तो विज्ञापन जारी हुआ और न ही रेलवे को जानकारी दी गई। सीबीआई ने लालू परिवार सहित 103 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है, जिनमें से 4 की मृत्यु हो चुकी है।

सीबीआई और बचाव पक्ष की दलीलें-

सीबीआई का दावा:

यह स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग का मामला है। जमीन दस्तावेज, पैसे का लेन-देन और लाभार्थियों के बयान मजबूत सबूत हैं।

बचाव पक्ष की दलील:

लालू परिवार का कहना है कि यह सब राजनीतिक vendetta है। जमीन की खरीद-बिक्री वैध थी और रेलवे भर्ती से उसका कोई संबंध नहीं है। अब 8 दिसंबर की सुनवाई इस हाई-प्रोफाइल केस की दिशा तय करेगी। राजनीतिक हलकों में इसपर कड़ी नजर बनी हुई है।

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