Big Bazar Owner: किशोर बियानी
99 रुपये की पतलून बेचने वाला कैसे बना पेंटालून का मालिक
जब कभी शॉपिंग की बात होती है तो बिग बाजार का नाम सबसे पहले आता था। इसके पूरे देश में जलवा था। पर धीरे-धीरे अब बिग बाजार शहरों से गायब होते जा रहे हैं।
लोगों ने शायद सोचने की कोशिश भी नहीं की होगी कि बिग बाजार बंद क्यों हो रहे हैं। लेकिन, क्या आपको पता है कि इस सुपरमार्केट आउटलेट स्टोर चेन सिस्टम पर काम करने वाली कंपनी का मालिक कौन है?
किशोर बियानी
क्या आप जानते हैं कि भारत में इसका सबसे पहला स्टोर कब और कहां खोला गया था? देश की इस दिग्गज रिटेल चेन कंपनी और इसके मालिक से जुड़ी सभी जानकारी लेकर आये हैं।
यहां आपको बतायेंगे कि बिज़नेस रातों रात बड़ा नहीं हो जाता, उसके पीछे बरसों का अनुभव और मेहनत लगी होती है।
राजस्थान के मारवाड़ी परिवार में जन्में किशोर बियानी की सफलता की कहानी काफी संघर्षों से भरी और प्रेरणादायक है।
जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत पेंटालून नाम की कंपनी से की थी। इसके बाद अपनी मेहनत और लगन की बदौलत देखते ही देखते वह रिटेल बाजार के किंग बन गए।
साल 2017 में किशोर बियानी को फोर्ब्स इंडिया की 100 अमीर लोगों की लिस्ट में 55वां स्थान मिला।
किशोर बियानी एक ऐसा नाम है जिसे भारत में आधुनिक रिटेल का अगुवा माना जाता है। रिटेल किंग के नाम से मशहूर किशोर बियानी ने शॉपिंग को आसान बनाकर आम लोगों तक पहुंचाया।
फ्यूचर ग्रुप के फ्यूचर रिटेल के जरिए उन्होंने रिटेल बिजनेस का एक पूरा साम्राज्य खड़ा किया।
किशोर बियानी का जन्म साल 9 अगस्त 1961 में मुंबई के एक कपड़ा व्यापारी के घर हुआ था।
अपने फैमिली बिजनेस में उन्होंने काफी रुचि दिखाई। साल 1987 में कपड़े के बिजनेस को वियानी ने रेडीमेड कपड़ों की ओर मोड़ दिया।
26 साल की उम्र में बनाया ब्रांडः
शुरू में किशोर बियानी को स्टोनवॉश फैब्रिक के कारोबार में काफी सफलता मिली थी। उससे उनका उत्साह और आत्मविश्वास बहुत बढ़ गया था।
वह उस वक्त कुछ नया करना चाह रहे थे। किशोर ऐसा कुछ करना चाहते थे जिसके माध्यम से देशभर के अधिक से अधिक लोगों के साथ जुड़ा जा सके।
सिर्फ 26 साल की उम्र में उन्होंने Menzwear प्राइवेट लिमिटेड की शुरुआत की। कारोबार शुरू करने के बाद पांच साल तक उन्होंने कपडा उद्योग को समझने में लगाया।
फिर किशोर बियानी ने कारोबार की शुरुआत रेडीमेड कपड़ों के निर्माता के रूप में की और दो ब्रांड शुरू किए। इस प्रकार वह महज 26 साल की उम्र में ब्रांड निर्माता बन गये।
एकाएक आ गये अर्श परः
आज किशोर बियानी की आर्थिक हालत खराब है। कभी करोड़ों के मालिक किशोर बियानी को अब अपना मुंबई का सबसे पुराना मॉल भी बेचना पड़ गया है।
किशोर बियानी कोरोना महामारी के समय से ही भारी संकट में फंस चुके हैं। कर्ज संकट से जूझ रहे फ्यूचर ग्रुप के मालिक किशोर बियानी को अपना मॉल बेचकर बकाए का भुगतान करना पड़ा है।
फ्यूचर ग्रुप ने 476 करोड़ रुपये का वन टाइम सेटलमेंट किया है। कंपनी ने बंसी मॉल मैनेजमेंट कंपनी के लेडर्स को 571 करोड़ रुपये का बकाया दिया है।
यह रकम लेंडर्स के लिए 83 फीसदी की बकाया वसूली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह डील के रहेजा कॉर्प की ओर से बीते सोमवार को हुई है।
इसमें स्टांप ड्यूटी का भुगतान 28.56 करोड़ रुपये रहा। के रहेजा कॉर्प ने बैंकों को सीधे पेमेंट किया और इसके बदले में मॉल कंपनी को ट्रांसफर किया गया।
किशोर बियानी ने कर्जदाताओं का भुगतान करने के लिए सोबो मॉल को के रहेजा कॉर्प को बेच दिया है।
फ्यूचर ग्रुप के प्रमोटर बियानी ने 571 करोड़ रुपये के बकाए का एकमुश्त निपटारा कर 476 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। लेनदारों को उनकी कुल राशि का 83% वापस मिल गया है।
यह मॉल मुंबई का सबसे पुराना मॉल है। इसका मालिकाना हक बियानी परिवार के पास था, लेकिन अब इसे के रहेजा कॉर्प ने खरीद लिया है।
इसका नाम एसओबीओ सेंट्रल मॉल है। पहले क्रॉसरोड्स के नाम से जाना जाने वाला, सोबो सेंट्रल देश का पहला मॉल है, जो 1990 के दशक के अंत में दक्षिण मुंबई के हाजी अली इलाके में खुला था।
यह मॉल कोरोना के दौरान पूरी तरह से बंद हो चुका था। कोविड के बाद से ज्यादातर दुकानें बंद होने से इसे किराये पर देने के लिए कोई खरीदार नहीं मिल रहे हैं।
इसकी वजह से मॉल को चलाने वाली कंपनी बंसी मॉल मैनेजमेंट पर 571 करोड़ रुपये का कर्जा हो गया, जिसके चलते मॉल को बेचना पड़ा है। इस मॉल में अभी भी 1.5 लाख वर्ग फुट एरिया लीज पर देने के लिए खाली है।
कर्ज में डूबेः
मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में नए शॉपिंग मॉल्स के खुलने और कोरोना महामारी के कारण SOBO Central मॉल की हालत खस्ता होती गई।
इसका करीब सारा रियल एस्टेट फ्यूचर ग्रुप की कंपनियों को दिया गया था जो मुश्किलों से गुजर रही हैं।
कैनरा बैंक का कंपनी पर 131 करोड़ रुपये का बकाया है जबकि पीएनबी पर का बकाया 90 करोड़ रुपये है।
पीएनबी और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का फ्यूचर ब्रांड्स पर 350 करोड़ रुपये का बकाया है। बैंकों का फ्यूचर ग्रुप की कंपनियों पर 33,000 करोड़ रुपये का बकाया है।
कैसे डूबे बियानीः
किशोर वियानी ने अपने फैमिली बिजनेस में उन्होंने काफी रुचि दिखाई। फ्यूचर ग्रुप ने बिग बाजार का पहला स्टोर साल 2001 में खोला था।
साल 2006 तक ये बढ़कर 56 हुए और 2008 तक 116 हो गए। हालांकि, 2008 की मंदी का कंपनी पर बुरा असर पड़ा, लेकिन कंपनी फिर भी आगे बढ़ती ही रही।
हर साल नए स्टोर खुलते चले गए और साल 2019 तक कुल 295 स्टोर हो चुके थे। किशोर बियानी ने भारतीय मिडिल क्लास को एक ही छत के नीचे पूरा बाजार दे दिया।
बिग बाजार को भारत का वॉलमार्ट भी कहा जाता है। फ्यूचर ग्रुप के तहत 2002 में बिग बाजार की शुरुआत हुई, जिसे 2003 तक कई शहरों तक स्टोर्स के जरिए फैला दिया गया।
यह एक ऐसा स्टोर था, जो सस्ते कीमत पर सामान बेचने के लिए जाना जाता था। इस कारण देखते ही देखते देशभर में इसके स्टोर्स खुलने लगे।
फ्यूचर ग्रुप के चेन के बढऩे के साथ ही बियानी ने भी खूब तरक्की की। आलम ये रहा कि ये दुनिया के टॉप 10 अमीरों की लिस्ट में शामिल हो गए।
इनका नेटवर्थ 2017 में 2.8 अरब डॉलर था, जो 2019 में घटकर 1.8 अरब डॉलर हो गया।
दरअसल तेजी से आगे बढ़ने की होड़ में वियानी बाजार को समझने में मामूली सी चूक कर बैठे।
वह लगातार अलग-अलग शहरों में अपने स्टोर की चेन बढ़ाते रहे। इसके लिए बैंकों से कर्ज लेते रहे। उधर, 2018 में मंदी आई। इसके बाद 2020 में कोरोना।
दोनों की ऐसी मार पड़ी कि वियानी पर कर्ज बढ़ता ही चला गया। कर्ज के साथ-साथ ब्याज का दबाव और बाजार मंदी का दबाव यह सब वह झेल नहीं पाये और टूटने लगे।
दरअसल बाजार की उस पालिसी को उन्होंने अनदेखा कर दिया, जिसके तहत इस तरह के चेन स्टोर या अन्य के बारे में कहा जाता है कि जब तक एक का कर्ज हल्का न दो, दूसरे में हाथ मत डालो।
पर वियानी तो कर्ज लेते रहे और नये-नये स्टोर्स खोलते रहे। बाजार से जुड़ी इन नीतियों को नहीं समझना वियानी को भारी पड़ गया और एक बार फर्श से अर्श पर पहुंचे वियानी फिर से अर्श से फर्श पर गिर गये हैं।
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