Patna High Court: सहमति से बना शारीरिक संबंध दुष्कर्म नहीं, पटना हाईकोर्ट ने की टिप्पणी

2 Min Read

Patna High Court

पटना, एजेंसियां। पटना हाईकोर्ट ने टिप्पणी की है कि सहमति से बना शारीरिक संबंध दुष्कर्म नहीं है। दुष्कर्म से जुड़े एक मामले में कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि दो बालिग व्यक्तियों के बीच आपसी सहमति से बना शारीरिक संबंध बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता है। न्यायमूर्ति सोनी श्रीवास्तव की एकलपीठ ने आरोपी मोहम्मद सैफ अंसारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि सिर्फ इस आधार पर किसी पर दुष्कर्म का आरोप नहीं लगाया जा सकता कि बाद में शादी नहीं हो सकी। अदालत ने भागलपुर की निचली अदालत द्वारा पारित आदेश को रद्द करते हुए अभियुक्त के खिलाफ दर्ज धारा 376 के मामले को तथ्यहीन मानते हुए निरस्त कर दिया।

शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण का आरोप

आरोपी पर शादी का झांसा देकर एक साल तक शारीरिक संबंध बनाने का आरोप था, जबकि आरोपी की दलील थी कि दोनों वयस्क थे और रिश्ता आपसी सहमति पर बना था। हाईकोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘शादी का झूठा वादा करना’ और ‘परिस्थितियों के कारण विवाह न हो पाना’ दो अलग-अलग बातें हैं। यदि संबंध की शुरुआत से ही दोनों पक्षों की सहमति थी, तो बाद में विवाह न होने की स्थिति में इसे आपराधिक मामला बनाना कानून की मूल मंशा के खिलाफ है।

सुप्रीम कोर्ट का दिया हवाला

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए निचली अदालतों को निर्देश दिया कि वे ऐसे संवेदनशील मुकदमों में केवल औपचारिकता न निभाएं, बल्कि तथ्यों और साक्ष्यों की गहराई से जांच करें। हाईकोर्ट ने जोर देकर कहा कि पर्याप्त सबूत न होने की स्थिति में किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से कानूनी प्रक्रिया में घसीटना उचित नहीं है।

Share This Article